नयी दिल्ली , जनवरी 02 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत की सुधार यात्रा, विज्ञान- प्रौद्योगिकी और नवाचार द्वारा संचालित हो रही है जिसमें प्रौद्योगिकी शासन, प्रशासन और आर्थिक परिवर्तन के लिए केंद्रीय शक्ति के रूप में कार्य कर रही है।

डॉ सिंह ने कहा कि सरकार 2014 से निरंतर विज्ञान आधारित विकास पर विशेष ध्यान दे रही है और इसमें कई सुधार और पहल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत टीकों और चिकित्सा उपकरणों सहित उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकियों का आयातक होने की जगह अब निर्यातक बन गया है और देश की जैव-अर्थव्यवस्था विकास के एक प्रमुख इंजन के रूप में उभर रही है। वह यहां विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वर्ष 2025 की उपलब्धियों की जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि विज्ञान आधारित सुधार भारत को वर्ष 2047 से पहले ही एक शीर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाएंगे। अगले दो दशकों में देश के भविष्य का विकास अंतरिक्ष, महासागर, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे नवाचार-संचालित क्षेत्रों द्वारा निर्देशित होगा। उन्होंने कहा ' सरकार द्वारा आज विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में किए गए सभी प्रमुख सुधार प्रौद्योगिकी पर आधारित हैं।' राष्ट्रीय नीति निर्माण में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को लगातार प्राथमिकता देने के कारण यह परिवर्तन संभव हो पाया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2014 से अब तक, स्वतंत्रता दिवस के सभी भाषणों में कोई न कोई सशक्त वैज्ञानिक विषय रहा है, जो सरकार के दीर्घकालिक और वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उन्होंने वैज्ञानिक क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों की वर्ष 2025 की महत्वपूर्ण पहलों और परिणामों पर प्रकाश डाला। संवाददाता सम्मेलन में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. एके सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. रविचंद्रन सहित वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित थे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने डीप ओशन मिशन और गगनयान जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर जोर देते हुए कहा कि भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान और गहरे समुद्र की खोज दोनों के लिए एक साथ तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि जहां एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में जाएगा, वहीं भारत वर्ष 2027 में 6,000 मीटर की गहराई तक मानवयुक्त पनडुब्बी भेजेगा, जो एक ऐतिहासिक दोहरी उपलब्धि होगी।

उन्होंने एक लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान विकास एवं नवाचार (आरडीआई) कोष को वर्ष 2025 की प्रमुख उपलब्धि बताया जिसके तहत सरकार निजी क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास को प्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रही है। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक स्तर पर एक अनूठी सरकारी पहल है। इसके पूरक के रूप में, अनुसंधान निधि को लोकतांत्रिक बनाने, विशिष्ट संस्थानों से परे भागीदारी का विस्तार करने और अपने संसाधनों का लगभग 50-60 प्रतिशत गैर-सरकारी स्रोतों, जिनमें परोपकार और उद्योग शामिल हैं। इसे जुटाने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) की स्थापना की गई है।

डॉ. सिंह ने नेशनल क्वांटम मिशन, निधि, प्रेरणा/पर्स और वैभव कार्यक्रम जैसी पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य स्टार्टअप, अनुसंधान अवसंरचना और वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना है, जिसमें भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के साथ संरचित जुड़ाव भी शामिल है।

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