जैसलमेर , मार्च 06 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक सद्भाव एवं समरसता में दादागुरु परंपरा का अहम योगदान है।
श्री भागवत शुक्रवार को राजस्थान में जैसलमेर के डेडानसर मैदान में आयोजित तीन दिवसीय चादर महोत्सव में पहले दिन धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सैकड़ों की संख्या में दादाबाड़िया धार्मिक अनुष्ठानों, परपंरा, लेखन, अध्यात्म और संस्कृति की वाहक बनी हुई हैं।
इस कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सात मार्च को विश्वभर में एक साथ एक करोड़ आठ लाख श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक दादागुरु इकतीसा पाठ का ऐतिहासिक महासंकल्प है। महोत्सव स्थल से पहले श्री भागवत ने जैसलमेर किले में दादा जिनदत्त सूरि की पवित्र चादर का दर्शन किया।
श्री भागवत ने कहा कि दादागुरु की परंपरा में दिखाई देने वाला चमत्कार दरअसल सनातन संस्कृति के उस भाव का प्रतीक है, जो समस्त सृष्टि में एकत्व का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने गहन आकलन के बाद यही सत्य बताया है कि जीवन में विविधता अवश्य है, लेकिन केवल विविधता को ही जगह दी जाये तो एकता की जगह अनेकता दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि जैन दर्शन हमें सिखाता है कि जो जहां है, वहीं से आगे बढ़कर ईश्वर तक पहुंच सकता है। भगवान तक पहुंचने के अनेक मार्ग हैं, लेकिन यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ उस मार्ग पर चला जाये तो अंततः भगवान का साक्षात्कार अवश्य होता है।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब चारों ओर हालात विकट दिखाई दे रहे हैं। महायुद्ध जैसी स्थितियों को टालने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन दुनिया में झगड़े इसलिए होते हैं, क्योंकि हम अपने वास्तविक एकत्व को पहचान नहीं पाते। हम इस एकत्व को पहचान लें तो अधिकांश समस्याओं का समाधान अपने आप हो सकता है।
चादर महोत्सव के अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए गच्छाधिपति जिनमणिप्रभ सूरि ने कहा कि कार्यक्रम में विभिन्न हिंदू संतों की उपस्थिति से आयोजन की गरिमा और भी बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि जब इस महोत्सव का विचार सामने आया था, तभी से यह स्पष्ट था कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि दादागुरु की महिमा को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
आचार्य श्री ने कहा कि जो भव्य आयोजन दिखाई दे रहा है, वह दादागुरु के श्रद्धालुओं की आस्था और समर्पण का परिणाम है। श्रद्धालुओं ने मिलकर एकस्वप्न को साकार कर दिखाया है। उन्होंने कहा कि दादागुरु की कृपा और उनकी शिक्षाओं का ही प्रभाव है कि यह महोत्सव इतने व्यापक रूप में संपन्न होरहा है।
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