बेलेम , नवंबर 19 -- वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीसीपीआई) में भारत की रैंकिंग में एक साल के भीतर उल्लेखनीय गिरावट आई है।

सीसीपीआई की बुधवार को जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार भारत पिछले साल के 10वें स्थान से नीचे खिसककर इस साल 23वें स्थान पर आ गया है और मध्यम प्रदर्शन करने वाले देशों के समूह में शामिल हो गया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, जलवायु नीति और ऊर्जा उपयोग में मध्यम रेटिंग प्राप्त किया है, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपने प्रदर्शन के लिए अच्छी रेटिंग प्राप्त की है। यह दर्शाता है कि भारत महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के साथ जलवायु कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्ध है।

रिपोर्ट में हालांकि कोयले के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए एक संरचित समय-सीमा की सिफारिश की गयी है, जिसका अंतिम लक्ष्य पूरी तरह से कोयले के उपयोग को समाप्त करना है। इसमें कोयले के उपयोग को पूरी तरह से बंद करने की समय-सीमा निर्धारित करना और कोयले के अधिकतम उपयोग वाले वर्ष की पहचान करना शामिल है। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि जीवाश्म ईंधनों पर दी जाने वाली सब्सिडी को विकेंद्रीकृत, समुदाय-स्वामित्व वाली नवीकरणीय ऊर्जा पहलों की ओर मोड़ा जाना चाहिए। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मज़बूत सामाजिक और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया गया है।

भारत ने नीलामी और राजकोषीय उपायों का उपयोग करके अपनी स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाया है। सीसीपीआई विशेषज्ञों ने नीलामी में रिकॉर्ड स्तर की भागीदारी और टैरिफ में निरंतर गिरावट का उल्लेख किया है। भारत ने 2025 तक अपनी स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त कर लिया है, जो एक उल्लेखनीय उपलब्धी है, क्योंकि भारत ने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के तहत इस लक्ष्य को 2030 से बहुत पहले ही प्राप्त कर लिया है।

विशेषज्ञ हालांकि हरित विकास के लिए धन वितरण और राष्ट्रीय कार्बन बाजार ढांचे में विकास के लिए भारत की सराहना करते हैं, लेकिन देश की कोयले पर निर्भरता को लेकर चिंता भी जताते हैं। वर्तमान में कोयले के उपयोग को समाप्त करने के लिए कोई राष्ट्रीय समय-सीमा निर्धारित नहीं है और नए कोयला ब्लॉकों की नीलामी भी जारी है। उल्लेखनीय है कि भारत सबसे बड़े विकसित कोयला भंडार वाले शीर्ष 10 देशों में शामिल है और अपने कोयला उत्पादन का विस्तार करने की योजना बना रहा है।

भारत ने सितंबर 2025 तक 20.8 गीगावाट की 'सोलर रूफ टॉप' क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें पिछले वर्ष लगभग 9 गीगावाट की वृद्धि हुई है। यह देश में स्थापित कुल सौर क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत है। फिर भी, विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि बड़े ग्रिड-स्तरीय नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के परिणामस्वरूप भूमि विवाद, समुदायों का विस्थापन और जल संकट में वृद्धि हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकारों के हनन और पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचाने वाली कई घटनाएँ भी सामने आयी हैं। भारत के अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) का लक्ष्य 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करना है और 2005 के स्तर की तुलना में उत्सर्जन तीव्रता को 45 प्रतिशत कम करना है।

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