बेंगलुरु , अप्रैल 04 -- कृषि-उद्यम मंच 'अमीबा फार्म्स' ने भारत की कृषि-भूमि अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। इस रोडमैप के तहत भारत में चंदन की खेती को 2030 तक पुनर्जीवित करने और 2040 तक इसका वैश्विक निर्यात बढ़ाने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा भी निर्धारित की गई है।
यह घोषणा एक उच्च-स्तरीय 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-संचालित बागवानी बुद्धिमत्ता कार्यक्रम' में की गई, जिसमें उद्योग के विशेषज्ञ और हितधारक शामिल हुए। इसी कार्यक्रम में कंपनी ने औपचारिक रूप से अपने पहले क्षेत्रीय भागीदार अरविंद राव को भी अपने साथ जोड़ा।
कंपनी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य दो लाख से अधिक रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा करना है, विशेष रूप से ग्रामीण भारत में। इसके लिए एक ऐसा मंच-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया जाएगा जो शहरी 'गिग मॉडल्स' (अस्थायी रोजगार मॉडल्स) जैसा ही होगा लेकिन विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए ज्यादा अनुकूल होगा।
इस कार्यक्रम की एक खास बात थी 'चंदन के जनक' कहे जाने वाले अनंत पद्मनाभ का संबोधन। उन्होंने भारत के चंदन क्षेत्र को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए एक दीर्घकालिक योजना पेश की।
उन्होंने बताया कि भारत में चंदन का उत्पादन 1970-80 के दशक में सालाना लगभग 5,000 टन होता था, जो अब घटकर लगभग 300 टन रह गया है। उन्होंने इस स्थिति को देखते हुए इस क्षेत्र में तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने चंदन क्षेत्र के पुनरुद्धार और विस्तार के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा पेश करते हुए कहा, "साल 2030 तक भारत चंदन के क्षेत्र में अपनी खोई हुई शान फिर से हासिल कर लेगा और 2040 तक देश इस मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाएगा और दुनियाभर में चंदन का निर्यात करना शुरू कर देगा।"श्री पद्मनाभ ने 1964 में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना पूरा जीवन चंदन के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है। खासकर उस दौर में जब चंदन के अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित