नयी दिल्ली , मार्च 05 -- भारत और फिनलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को 'डिजिटलीकरण तथा सतत विकास' के क्षेत्र में रणनीतिक स्तर तक बढाने और प्रौद्योगिकी, गतिशीलता और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए गुरुवार को कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए और अनेक नयी पहलों की घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भारत यात्रा पर आये फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब के साथ गुरुवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये।

दोनों देशों ने पर्यावरण सहयोग , सांख्यिकी और माइग्रेशन तथा मोबिलिटी के क्षेत्र में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये और डिजिटल प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, अनुसंधान, स्टार्टअप और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग प्रगाढ करने के लिए नई संयुक्त पहलों की घोषणा की गई। प्रमुख समझौतों में से एक माइग्रेशन और मोबिलिटी के क्षेत्र में है जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच कुशल पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाना है।

एक अन्य समझौता पर्यावरण सहयोग पर पहले से जारी समझौता ज्ञापन के नवीनीकरण से संबंधित है जिस पर पहली बार नवंबर 2020 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस नवीनीकृत समझौते के तहत सततता से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया जाएगा, जिनमें जैव ऊर्जा, कचरे से ऊर्जा समाधान, ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ, लचीला नवीकरणीय ऊर्जा ढाँचा, हरित हाइड्रोजन और पवन, सौर तथा छोटे जलविद्युत जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत शामिल हैं।

दोनों देशों ने सांख्यिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणालियों में सहयोग बढ़ाना और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है।

इन समझौतों के अलावा, दोनों देशों ने उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग मजबूत करने के लिए कई नई पहलों की भी घोषणा की। एक प्रमुख घोषणा भारत-फिनलैंड संबंधों को डिजिटलीकरण और सतत विकास के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने की है जो उन्नत प्रौद्योगिकियों और जलवायु-केंद्रित विकास में बढ़ते सहयोग को दर्शाती है।

दोनों देशों ने यह भी सहमति जताई कि भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और फिनलैंड की नवाचार वित्तपोषण एजेंसी के बीच एक कार्यान्वयन व्यवस्था के तहत संयुक्त अनुसंधान प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे, ताकि सहयोगी शोध परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसे हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से से बल मिलने की उम्मीद है।

उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत और फिनलैंड डिजिटलाइजेशन पर एक बहु-क्षेत्रीय संयुक्त कार्य समूह भी स्थापित करेंगे। यह समूह 5 जी और 6 जी संचार, क्वांटम संचार, उच्च-प्रदर्शन और क्वांटम कंप्यूटिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।

दोनों देशों ने 6 जी के लिए एक संयुक्त कार्यबल बनाने की भी घोषणा की, जिसमें फिनलैंड के ओलू विश्वविद्यालय और भारत के भारत 6 जी गठबंधन के शोधकर्ता शामिल होंगे, ताकि अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीकों पर अनुसंधान और तकनीकी विकास को आगे बढ़ाया जा सके।

दोनों देशों के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ने के प्रयासों के तहत भारत और फिनलैंड एक 'इंडो-फिनलैंड स्टार्टअप कॉरिडोर' के माध्यम से स्टार्टअप सहयोग को भी बढ़ावा देंगे। इस पहल के तहत भारतीय स्टार्टअप को फिनलैंड के प्रमुख स्टार्टअप कार्यक्रम स्लश हेलसिंकी में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि फिनलैंड के स्टार्टअप्स को नई दिल्ली में आयोजित स्टार्टअप महाकुंड में भागीदारी के लिए बढ़ावा दिया जाएगा।

दोनों देशों ने यह भी घोषणा की कि वे 2026 में भारत में विश्व चक्रीय अर्थव्यवस्था फोरम 2026 की सह-मेजबानी करेंगे। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा फिनलैंड के नवाचार कोष 'सितरा' के साथ साझेदारी में किया जाएगा।

दोनों सरकारों ने अपने-अपने विदेश मंत्रालयों के बीच औपचारिक कांसुलर संवाद स्थापित करने पर भी सहमति व्यक्त की, ताकि कांसुलर मामलों में समन्वय मजबूत किया जा सके और यात्रा तथा लोगों के बीच संपर्क को सुगम बनाया जा सके।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित