नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- भारत और तंज़ानिया ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग का दायरा बढाकर इसमें दोनों देशों की नौसेनाओं और थल सेनाओं के साथ-साथ वायु सेनाओं को भी शामिल करने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों देशों ने सहयोग की संभावना वाले अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की।

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि दोनों देशों के बीच संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की दो दिन की चौथी बैठक आज ज़ांज़ीबार में संपन्न हुई। बैठक में दोनों देशों ने रक्षा सहयोग की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और मज़बूत करने के लिए कई क्षेत्रों पर चर्चा की, जिनमें सैन्य प्रशिक्षण, सेनाओं के बीच सहयोग, समुद्री सुरक्षा तथा रक्षा उद्योग में सहयोग शामिल हैं। दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी सहयोग, शांति स्थापना (पीसकीपिंग) प्रशिक्षण तथा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर , साइबर और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में क्षमता निर्माण सहित नए सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा की, ताकि द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ किया जा सके। सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग को भी एक संभावित नए क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया। इसके अतिरिक्त दोनों देशों ने वायु सेनाओं के बीच सहयोग शुरू करने पर सहमति व्यक्त की, जिससे नौसेनाओं और थल सेनाओं के बीच पहले से मौजूद सहयोग को और पूरक बनाया जा सकेगा।

समिति में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संयुक्त सचिव (रक्षा सहयोग) अमिताभ प्रसाद ने किया, जिसमें रक्षा विभाग तथा भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। तंज़ानिया के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व इब्राहिम म्होना, प्रमुख - संचालन एवं प्रशिक्षण, तंज़ानिया पीपुल्स डिफेन्स फ़ोर्स ने किया। तंज़ानिया में भारत के उच्चायुक्त बिश्वदीप डे भी बैठक में मौजूद थे।

भारत और तंज़ानिया के बीच घनिष्ठ, सौहार्दपूर्ण और रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पांच वर्षीय रोडमैप द्वारा निर्देशित किया जाता है।

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