नयी दिल्ली , जनवरी 06 -- गोवा में इस महीने के अंत में होने वाले भारत ऊर्जा सप्ताह-2026 में अन्य विषयों के साथ हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था पर भी चर्चा होगी।

भारत ऊर्जा सप्ताह का आयोजन 27 से 30 जनवरी तक गोवा में किया जायेगा। इसमें वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के दुनिया भर के मंत्री, कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, नीति निर्माता, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद् और प्रौद्योगिकी प्रदाता जुटेंगे। इसमें ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, निवेश को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के व्यावहारिक उपायों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।

सम्मेलन में मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठकें, सीईओ डायलॉग्स, सार्वजनिक-निजी क्षेत्र संवाद, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, प्रदर्शनियां, सामाजिक कार्यक्रम और मीडिया से जुड़ाव कार्यक्रम होंगे।

विशेष सत्र में हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, हरित वित्त, संवहनीय ईंधन, चक्रीयता, डिजिटल बदलाव और कार्यबल विकास पर केंद्रित चर्चा होगी। व्यापक अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी और देश-विशिष्ट के पवेलियनों से युक्त विस्तारित प्रदर्शनी में ऊर्जा मूल्य संपूर्ण श्रृंखला की सैकड़ों कंपनियां भाग लेंगी।

भारत ऊर्जा सप्ताह देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है, जिसमें सुरक्षित, संवहनीय और किफायती ऊर्जा भविष्य को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रणेता, उद्योग जगत के अधिकारी और नवप्रवर्तक एक साथ जुटते हैं। तटस्थ अंतर्राष्ट्रीय मंच के तौर पर यह सम्मेलन निवेश, नीतिगत समन्वय और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है।

इस बार ऊर्जा सुरक्षा सम्मेलन में 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है।

भारतीय पेट्रोलियम उद्योग संघ (एफआईपीआई) तथा डीएमजी इवेंट्स द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह सम्मेलन ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और संधारणीयता पर सहयोग के लिए तटस्थ और वैश्विक स्तर पर जुड़ा मंच है। इसमें अमरीका, यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडलों के भाग लेने की संभावना है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के विश्व ऊर्जा आउटलुक 2025 के मुताबिक, अकेले भारत 2050 तक वैश्विक ऊर्जा मांग की 23 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का उपभोग करेगा, जो विश्व में सर्वाधिक होगा।

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