नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और अर्जेंटीना के राष्ट्रीय कृषि प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनटीए) ने बुधवार को आईसीएआर-आईएनटीए कार्य योजना 2025-2027 पर हस्ताक्षर किये हैं, जो कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान एवं क्षमता निर्माण में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने वाली एक रणनीतिक पहल है।

अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कौसिनो ने इस समझौते को राष्ट्रपति जेवियर मिलेई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन का प्रत्यक्ष परिणाम कहा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरक शक्तियों पर बल दिया।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक ने बुधवार को भारत में अर्जेंटीना के राजदूत के साथ कार्य योजना का आदान-प्रदान किया, जो भारत-अर्जेंटीना कृषि सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

अर्जेंटीना के राजदूत कौसिनो ने कहा, "यह महत्वपूर्ण कदम जुलाई 2025 में अर्जेंटीना यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मिलेई और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन का परिणाम है।" उन्होंने दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच उच्च स्तर के सहयोग का उल्लेख किया और 2019 में दिल्ली में अर्जेंटीना के कृषि कार्यालय खुलने के बाद से कृषि सहचारी मारियानो बेहरान के प्रयासों की सराहना की।

यह समझौता प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, सतत कृषि विज्ञान, यंत्रीकरण, सूक्ष्म सिंचाई एवं उर्वरक संचार, फसल एवं पशु जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन सुधार, समशीतोष्ण एवं उष्णकटिबंधीय फसलों के उत्पादन प्रौद्योगिकी, डिजिटल कृषि, जैव-सुरक्षा और पादप स्वच्छता उपायों तथा मूल्य श्रृंखला सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को दर्शाता है। कार्यान्वयन में संयुक्त अनुसंधान, जर्मप्लाज्म का आदान-प्रदान, विशेषज्ञों की भागीदारी और संरचनात्मक प्रशिक्षण एवं अध्ययन यात्राएं शामिल होंगी।

योजनाबद्ध अध्ययन यात्राओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ग्रीनहाउस सब्जी उत्पादन, पुष्पकृषि, शीतोष्ण फल, फसल कटाई के बाद की जीवन पद्धति, कार्यात्मक खाद्य विकास, पशु चिकित्सा, पशुधन पालन, अपशिष्ट-से-धन प्रौद्योगिकी, सूक्ष्मजीव आधारित चारा संवर्धन, डिजिटल कृषि और स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता प्रणालियां शामिल होंगी। जर्मप्लाज्म आदान-प्रदान में सोयाबीन, सूरजमुखी, मक्का, ब्लूबेरी, खट्टे फल, जंगली पपीते, अमरूद और चुनिंदा सब्जियां शामिल होंगी।

यह साझेदारी तिलहन एवं दलहन मूल्य श्रृंखलाओं, कृषि मशीनीकरण और बागवानी मूल्य श्रृंखला विकास, जिसमें अवसंरचना एवं रोपण सामग्री का आदान-प्रदान शामिल है, में सहयोग को भी मजबूती मिलेगी। पौधा एवं पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में, कार्य योजना में खुरपका-मुंहपका रोग उन्मूलन के लिए क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियां एवं तकनीकी आदान-प्रदान तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करके कीट निगरानी एवं प्रबंधन पर बेहतर सहयोग की परिकल्पना की गई है।

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