नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- उद्योग संगठनों ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की सराहना करते हुए कहा है कि इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे और भारतीय निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार रात हुई टेलीफोन वार्ता के बाद श्री ट्रंप ने कहा कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करेगा और अमेरिका से आयात बढ़ायेगा। उन्होंने कहा कि बदले में अमेरिका भारतीय उत्पादों पर जवाबी आयात शुल्क 25 प्रतिशत से घटाकर तत्काल प्रभाव से 18 प्रतिशत करेगा।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राजीव मेमानी ने इस समझौते को भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में "एक महत्वपूर्ण कदम" बताया। उन्होंने बताया कि यह कदम भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ायेगा और विनिर्माण वृद्धि, रोजगार सृजन तथा मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं के विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश संबंधों को प्रगाढ़ करने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि इस सकारात्मक विकास को उद्योगों के लिए ठोस परिणामों और सतत आर्थिक विकास में बदला जायेगा।

फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पुनर्संयोजन का प्रतीक बताते हुए कहा कि जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किये जाने से दुनिया के सबसे बड़े आयातक देश (अमेरिका) में भारतीय उत्पाद ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण तथा समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि इस समझौते से व्यापारिक विश्वास मजबूत होगा और द्विपक्षीय आर्थिक सहभागिता बढ़ेगी।

अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में भारत के खिलाफ 25 प्रतिशत जवाबी आयात शुल्क लगाया था। उसी महीने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के लिए 25 प्रतिशत का अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया गया था।

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने इसे दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह एक नयी वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि निर्यात शुल्क में कटौती से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी। भारत अब बांग्लादेश, वियतनाम, श्रीलंका, ताइवान, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम शुल्क का लाभ उठा सकेगा।

भारतीय निर्यातकों के महासंघ (फियो) ने इसे "अब तक का सबसे बड़ा समझौता" बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ावा देने तथा मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण और बड़ी उपलब्धि है। फियो के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा कि यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ायेगा और सभी क्षेत्रों में भारत के निर्यात विकास को एक मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई के लिए बड़े अवसर पैदा करता है। इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा और परिधान, दवा, रसायन, चमड़े के उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, और कृषि उत्पाद जैसे क्षेत्रों को इससे काफी फायदा होने की उम्मीद है।

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