जम्मू , फरवरी 10 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को विधानसभा में बजट 2026-27 पर चर्चा का जवाब देते हुए 'भारत-अमेरिका व्यापार समझौते' के प्रावधानों पर गहरी चिंता व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अमेरिका से बादाम और अखरोट जैसे 'सूखे मेवे' के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने से केंद्र शासित प्रदेश की बागवानी आधारित पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने तर्क दिया कि स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए अखरोट, बादाम और सेब को आयात रियायतों से बाहर रखा जाना चाहिए था।

बजट की आलोचनाओं का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता का बचाव किया। उन्होंने इसे एक जिम्मेदार वित्तीय उपाय बताते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर को अगले 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो भविष्य के विकास के लिए एक बड़ी राहत है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट का प्राथमिक लक्ष्य समाज के सबसे गरीब और कमजोर तबके की सेवा करना है।

श्री अब्दुल्ला ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया कि बजट केवल केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर निर्भर है। उन्होंने अपनी सरकार की ओर से कई स्वतंत्र पहलों की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार बिना किसी केंद्रीय सहायता के अपने बजट से मुफ्त एलपीजी सिलेंडर प्रदान करेगी। जिन बच्चों ने माता-पिता दोनों को या परिवार के एकमात्र कमाने वाले को खो दिया है, उन्हें हर महीने 4,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। महिलाओं के बाद अब दिव्यांग व्यक्तियों को भी सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी गई है। आदिवासी और गरीब छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू की गई हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि बागवानी क्षेत्र में पहली बार मौसम आधारित फसल बीमा शुरू किया जा रहा है। रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने एक बड़ी राहत देते हुए कहा कि "ईश्वर ने चाहा तो इसी साल से दिहाड़ी मजदूरों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।" उन्होंने कृषि, पशुपालन और मछली पालन जैसे क्षेत्रों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित