नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को भारतीय किसानों के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इसका मुख्य उदेश्य अमेरिकी किसानों के उत्पादों को भारतीय बाजार में बेचकर अमेरिकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना है।
डॉ. कुमार ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि भारतीय कृषि व्यवस्था छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है, जबकि अमेरिकी कृषि बड़े कॉरपोरेट संस्थानों, भारी सरकारी सब्सिडी और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है। ऐसे में यदि भारतीय कृषि बाजार को अमेरिकी उत्पादों के लिए खोला जाता है, तो यह भारतीय किसानों को अन्यायपूर्ण प्रतिस्पर्धा में झोंकने जैसा होगा।
उन्होंने कहा कि सब्सिडी-युक्त अमेरिकी कृषि उत्पादों के आने से भारतीय किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलेगा।सस्ते आयात से न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित होंगे और पहले से कर्ज़ तथा बढ़ती लागत से जूझ रहे किसानों के लिए यह समझौता घातक साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता खेती को किसानों के हाथ से निकालकर बड़ी कंपनियों के हवाले कर सकता है। आयात पर निर्भरता बढ़ने से आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा कमजोर होगी।
उन्होंने कहा, "हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार इस समझौते की पूरी जानकारी तुरंत सार्वजनिक करे और यह सुनिश्चित करे कि भारतीय किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। भारत का किसान किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते की बलि नहीं बन सकता है।
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