पेरावूर , फरवरी 26 -- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को केरल के पेरावूर में 'किसान सम्मेलन (कर्षक संगमम)' को संबोधित करते हुए किसानों को 'भारत की नींव' बताया और केंद्र सरकार पर अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते के माध्यम से उनके हितों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
श्री गांधी ने केसी वेणुगोपाल, सनी जोसेफ, के सुधाकरन और शफी परम्बिल सहित राज्य के नेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि देशभर में किसान कीमतों की असुरक्षा और भंडारण सुविधाओं की कमी से लेकर मानव-पशु संघर्ष की बढ़ती घटनाओं जैसी निरंतर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी देश का निर्माण हवा में नहीं किया जा सकता। जैसे एक इमारत को नींव की जरूरत होती है, वैसे ही भारत को एक नींव की जरूरत है और वह नींव भारतीय किसान है। उन्होंने कहा कि यदि आप अपनी नींव का सम्मान नहीं करते हैं, तो आप कभी भी कुछ भी निर्माण नहीं कर सकते।
सम्मेलन में स्थानीय नेताओं और किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों का जिक्र करते हुए श्री गांधी ने शीत भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) के अपर्याप्त बुनियादी ढांचे, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) हासिल करने के संघर्ष और कृषि क्षेत्रों में वन्यजीवों के हमलों के बढ़ते खतरे के बारे में बात की।
कांग्रेस नेता ने वायनाड से सांसद के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि मैंने वायनाड में मानव-पशु संघर्ष की त्रासदी को अपनी आँखों से देखा है। यह एक जटिल समस्या है, अगली सरकार इसे संवेदनशीलता और तकनीकी मानसिकता के साथ देखेगी।
सांसद ने किसानों को आश्वासन दिया कि केरल में भविष्य की संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार उनके पास एक 'सेवा प्रदाता' के रूप में पहुँचेगी, न कि इस बात का इंतजार करेगी कि किसान अपनी शिकायतों के साथ अधिकारियों के पास आएं। उन्होंने कहा कि किसानों को मूल्य सुरक्षा, भंडारण सुविधा और कठिन समय में सहायता की आवश्यकता है। ये कोई जटिल माँगें नहीं हैं।
श्री गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय कृषि को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलने से छोटे और सीमांत किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के पास छोटे खेत हैं और मशीनीकरण का स्तर कम है, जबकि अमेरिकी किसानों के पास विशाल खेत और उच्च स्तर का मशीनीकरण है। भारत में अमेरिकी किसानों को सोयाबीन, मक्का और फल बेचने की अनुमति देना हमारी नींव को नष्ट कर देगा।
भारत की हरित क्रांति और श्वेत क्रांति जैसे कृषि मील के पत्थरों का हवाला देते हुए श्री गांधी ने तर्क दिया कि ये सफलताएं घरेलू कृषि को मजबूत करने पर टिकी थीं। उन्होंने दावा किया कि भारत और अमेरिका के बीच हालिया बातचीत कृषि बाजार तक पहुँच को लेकर हुई है।
श्री गांधी ने अपने हमले को तेज करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय व्यावसायिक हितों के बजाय श्री मोदी अमेरिकी कानूनों और वहां के राजनीतिक घटनाक्रमों एवं उनकी कंपनियों के दबाव में फैसले ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन दबावों के कारण ऐसे नीतिगत विकल्प चुने जा रहे हैं जो भारतीय किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने संसद की एक हालिया घटना का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोलने से रोका गया क्योंकि वह व्यापार वार्ता से संबंधित संवेदनशील मुद्दों को उठाना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि भारत के इतिहास में पहली बार विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पहले गांधी के इसी तरह के आरोपों को खारिज कर दिया है और कहा है कि व्यापार वार्ता राष्ट्रीय हित में किया गया है और उचित संसदीय प्रक्रियाओं का पालन भी किया गया है।
राज्य की राजनीति की ओर रुख करते हुए श्री गांधी ने किसानों को अगले केरल विधानसभा चुनावों के लिए यूडीएफ के घोषणापत्र को आकार देने में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि केरल की नींव केरल के किसान और मजदूर हैं। सरकार को उनके पास जाना चाहिए, न कि उनके समस्याओं के साथ आने का इंतजार करना चाहिए।
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