नयी दिल्ली , जनवरी 08 -- वित्त वर्ष 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल करने के बाद भारत अगले दो साल भी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा गुरुवार को जारी रिपोर्ट 'विश्व आर्थिक स्थिति एवं परिदृश्य 2026' में मौजूदा वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया गया है। इसमें कहा गया है कि साल 2026 (भारत के मामले में वित्त वर्ष 2026-27) में यह घटकर 6.6 प्रतिशत और 2027 में मामूली तौर पर बढ़कर 6.7 प्रतिशत रहेगी।

उल्लेखनीय है कि मौजूदा वित्त वर्ष का संयुक्त राष्ट्र का विकास अनुमान सरकार द्वारा बुधवार को जारी अनुमान से पूरी तरह मेल खाता है।

भारत में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अर्थशास्त्री क्रिस्टोफर गैरोवे ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि भारत "वैश्विक वृद्धि का नेतृत्व" करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि निजी उपभोग बढ़ने और अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने से पहले वहां आयात बढ़ने का फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला। पूंजी निर्माण भी बढ़ा है। वहीं, दूसरी तरफ, दक्षिण एशिया के दूसरे देशों की तरह भारत पर भी अधिक ऋण को बोझ है और राजस्व का एक बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने पर खर्च होता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी आयात शुल्क और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण जोखिम भी बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के साल 2025 में 2.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। साल 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर 2.7 फीसदी और 2027 में 2.9 फीसदी रहने का अनुमान है।

श्री गैरोवे ने कहा कि वैश्विक विकास की मौजूदा रफ्तार सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के लिए नाकाफी है।

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