इटावा , जनवरी 11 -- महाभारत कालीन सभ्यता से जुड़े उत्तर प्रदेश के इटावा में निर्माणाधीन केदारेश्वर महादेव मंदिर आस्था, संस्कृति और राजनीति के संगम में रुप में चर्चा में है।
उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर की कृति माने जा रहे केदारेश्वर मंदिर का निर्माण समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल पर कराया जा रहा है। श्री यादव समय समय पर मंदिर निर्माण की प्रगति के बारे में जानकारी देते रहते हैं।
केदारेश्वर महादेव मंदिर को उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर की दूसरी कृति माना जा रहा है लेकिन केदारेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी उमाशंकर इससे साफ इंकार करते हैं। उनका कहना है बेशक केदारेश्वर मंदिर केदारनाथ जैसा लगता हो लेकिन केदारनाथ मंदिर और केदारेश्वर मंदिर में जमीन आसमान का अंतर है।
फिलहाल इटावा में बन रहा केदारेश्वर महादेव मंदिर देश भर में लगातार चर्चा में बना हुआ है। मंदिर का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है लेकिन इसकी बनावट धार्मिक महत्व और इससे जुड़े राजनीतिक संकेत के कारण यह मंदिर सुर्खियों में है। अखिलेश यादव ने केदारेश्वर महादेव मंदिर का एक वीडियो जारी किया है।
केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण इटावा लाइन सफारी के सामने पूरी तरह से पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली में किया जा रहा है। मंदिर की रूपरेखा उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर से प्रेरित मानी जा रही है। कहा जा रहा है कि श्रद्धालुओं को केदारनाथ मंदिर की तरह ही आध्यात्मिक अनुभव मिल सके इसलिए मंदिर का निर्माण शिव शक्ति अक्ष रेखा पर स्थित है जिसे धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है।
मंदिर में स्थापित शिवशिला नेपाल से लाई गई है। मंदिर परिसर में स्थापित नंदी की प्रतिमा दक्षिण भारत के मैसूर के प्रसिद्ध मंदिरों में मौजूद नंदी के तर्ज पर बनाई गई है। मंदिर में लगाए जा रहे काले पत्थरों को जोड़ने के लिए प्राचीन तकनीक और विशेष पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया गया है जिससे मंदिर की उम्र लंबे समय तक कायम रह सके। मंदिर के गर्भ गिरे और बाहरी हिस्सों में लगाए गए पत्थर दक्षिण भारत से भगाए गए हैं। इन काले पत्थरों को बारिश और मौसम के प्रभाव को सहन करने की क्षमता मानी जाती है।
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