अहमदाबाद , फरवरी 21 -- टी20 विश्व कप में अब स्पिन गेंदबाज़ों का दबदबा साफ नजर आने लगा है। भारतीय टीम को इस बात का बख़ूबी अंदाज़ा है कि वह अब तक पावरप्ले में वह आक्रामक खेल नहीं दिखा पाई है, जो टूर्नामेंट से पहले द्विपक्षीय सीरीज में उसकी ताक़त हुआ करती थी।

अहमदाबाद में गुरुवार को हुए अभ्यास सत्र में रविवार को होने वाले सुपर-8 मुक़ाबले की रणनीतिक तैयारी साफ़ दिखी। ऐडन मारक्रम ने बल्लेबाज़ी की बजाय गेंदबाज़ी पर ज़्यादा पसीना बहाया। उन्होंने राउंड द विकेट लंबा स्पेल डाला और पिच में मौजूद रफ़ वाले हिस्सों का फ़ायदा उठाने की कोशिश की।

मारक्रम ने कंसल्टेंट कोच एल्बी मॉर्कल को काफ़ी देर तक गेंदें फेंकी। मॉर्कल ने भी स्पिन का सामना आक्रामक अंदाज़ में किया। वे जगह बनाकर इनसाइड आउट शॉट खेलने के अलावा लेंथ गेंदों पर सीधा प्रहार कर रहे थे। यह ड्रिल साफ तौर पर टीम इंडिया की चुनौती से निपटने के लिए तैयार की गई थी।

दक्षिण अफ़्रीका की तैयारी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने स्थानीय स्पिनरों को पिच पर हार्ड लेंथ पर गेंदबाज़ी करने को कहा, ताकि वरुण चक्रवर्ती जैसे गेंदबाज़ों के खतरे से निपटा जा सके। उनका मकसद बल्लेबाज़ों को अपनी ताकत से गेंद को दूर मारना और सीधे शॉट खेलने के लिए तैयार करना था।

करीब एक घंटे बाद भारतीय नेट्स पर भी कुछ ऐसा ही नज़ारा दिखा। वरुण चक्रवर्ती और वॉशिंगटन सुंदर सहित ऑफ स्पिनरों ने बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को जमकर अभ्यास कराया। तिलक वर्मा, इशान किशन और रिंकू सिंह ने स्पिन के ख़िलाफ लंबी बल्लेबाज़ी की।

भारतीय गेंदबाजी कोच मोर्ने मॉर्कल ने कहा, ''अच्छी बात यह है कि इन मुश्किल चरणों के बावजूद हम 190-200 का स्कोर बना पा रहे हैं। हमारी बोलिंग यूनिट के रहते यह स्कोर मैच जीतने के लिए काफ़ी है। ड्रेसिंग रूम में भी यही बात हो रही है कि धीमे दौर को समझदारी से निकालें और फिर तय करें कि किस ओवर से अटैक करना है। हमें बस एक सॉलिड लॉन्च पैड की जरूरत है। ''इस दौरान हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव पिच का मुआयना करने में व्यस्त रहे। दोनों पिच की सतह को गहराई से परख रहे थे और आपस में चर्चा कर रहे थे। दूसरी ओर, तेज गेंदबाज़ अभ्यास के पहले घंटे में ज़्यादातर समय बाउंड्री पर कैचिंग ड्रिल और हल्की रनिंग करते ही नजर आए।

सुपर-8 के इस मोड़ पर स्पिन की भूमिका अहम हो गई है। नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ अभिषेक शर्मा के दो बार स्पिन पर आउट होने के बाद यह बहस और तेज हो गई है। जब टीम इंडिया के गेंदबाज़ी कोच मॉर्ने मॉर्कल से स्पिन के ख़िलाफ रणनीति पर सवाल हुआ, तो उन्होंने टीम की तैयारियों पर भरोसा जताया।

मॉर्कल ने कहा, "हमारे पास साफ़ प्लान है। पहली प्राथमिकता स्पिनरों पर काउंटर अटैक करके उन्हें दबाव में लाने की है। हालांकि, अक़्लमंदी इसी में है कि हम हालात को जल्द भांप लें। सच तो यह है कि अब तक हमें ऐसी पिचें मिली हैं जहां धीमी गेंदों पर बड़े हिट लगाना चुनौतीपूर्ण रहा है।"आंकड़े भी मिडिल ओवर्स में बढ़ते दबाव की गवाही दे रहे हैं। 7 से 10 ओवर के बीच भारत का रन रेट महज़ 7.12 रहा है, जो सुपर-8 की टीमों में नीचे से तीसरे नंबर पर है। इसके उलट, रविवार को सामने खड़ी दक्षिण अफ़्रीका की टीम 10.37 की औसत से इस मामले में टॉप पर है। मिडिल ओवर्स में लय बरकरार रखने के लिए मशहूर भारतीय टीम के लिए यह गिरावट चिंताजनक लग सकती है, लेकिन मॉर्कल इसे परिस्थितियों के हिसाब से ढलने की कोशिश मानते हैं।

उन्होंने आगे कहा, "मुंबई में अमेरिका के ख़िलाफ़ हमने आक्रामक होने की कोशिश की थी और मुसीबत में फंस गए। इसलिए एक मजबूत बेस तैयार करना जरूरी है ताकि अंत में तेज़ी से रन बटोरे जा सकें। टीम ने अब तक स्पिन के ख़िलाफ़ वैसी बल्लेबाज़ी नहीं की है जैसा हम चाहते थे, लेकिन जैसे ही सही पिच मिलेगी, हम अपनी पुरानी लय में लौट आएंगे।"विरोधी टीमें पावरप्ले के बाद भारत की रन गति पर ब्रेक लगाने में कामयाब रही हैं। वे लेंथ को थोड़ा पीछे खींचकर बल्लेबाज़ों को खुद की ताक़त से शॉट खेलने पर मजबूर कर रहे हैं। द्विपक्षीय सीरीज में भारत इन्हीं ओवरों (7-10) में साउथ अफ़्रीका और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ करीब 9 की औसत से रन बना रहा था, मगर इस टूर्नामेंट में उसे पहले पारी संवारने पर ध्यान देना पड़ रहा है।

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