चेन्नई , अप्रैल 10 -- भारतीय क्रिकेट के वरिष्ठतम हस्तियों में शामिल सी.डी. गोपीनाथ का गुरुवार शाम निधन हो गया। वह 96 वर्ष के थे और भारत की इंग्लैंड के खिलाफ पहली ऐतिहासिक टेस्ट जीत (1952) के अंतिम जीवित सदस्य थे।

श्री गोपीनाथ अपने पीछे पत्नी कोमला, तीन बच्चे और पोते-पोतियों को छोड़ गए हैं। वह दुनिया के दूसरे सबसे उम्रदराज टेस्ट क्रिकेटर थे, उनसे आगे केवल नील हार्वी हैं।

1 मार्च 1930 को जन्मे चिंगलपट्टु दोरैकन्नु गोपीनाथ एक दाएं हाथ के बल्लेबाज और मध्यम गति के गेंदबाज थे। उन्होंने 1951 से 1960 के बीच भारत के लिए 8 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 242 रन बनाए और 50 नाबाद उनका सर्वोच्च स्कोर रहा। गेंदबाजी में उन्होंने एक विकेट हासिल किया।

घरेलू क्रिकेट में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। उन्होंने 83 प्रथम श्रेणी मैचों में 4,259 रन बनाए, जिसमें 9 शतक और 23 अर्धशतक शामिल हैं, जबकि उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 234 रहा। वह मद्रास (अब तमिलनाडु) टीम के अहम सदस्य थे, जिसने 1954-55 में रणजी ट्रॉफी जीती थी।

श्री गोपीनाथ की खास बात यह रही कि वह 'डबल इंटरनेशनल' थे। उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व क्रिकेट और हॉकी, दोनों में किया। क्रिकेट के अलावा उन्होंने टेनिस और फुटबॉल में भी रुचि दिखाई।

क्रिकेट करियर के बाद भी उन्होंने खेल से जुड़ाव बनाए रखा। 1970 के दशक में वह राष्ट्रीय चयन समिति के अध्यक्ष बने और 1979 में इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के मैनेजर रहे।

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि गोपीनाथ भारत की पहली टेस्ट जीत का हिस्सा थे और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश की शुरुआती यात्रा के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक थे।

उनका योगदान उस दौर में आया, जब भारतीय क्रिकेट विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रहा था। 1952 में मद्रास (अब चेन्नई) में इंग्लैंड के खिलाफ मिली पहली टेस्ट जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास का अहम मोड़ मानी जाती है।

क्रिकेट जगत में शोक की लहर के बीच आज दोपहर उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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