नयी दिल्ली , जनवरी 23 -- भारतीय निर्यातकों के शीर्ष संगठन फियो ने कहा है कि भारत के कई प्रमुख वर्गों के उत्पादों को यूरोपीय संघ (ईयू) में वरीयता के आधार पर प्रवेश देने की सामान्य प्रणाली (जीपीएस) के लाभ से निलंबित किये जाने की नयी अधिसूचना का असर सीमित ही रहेगा क्योंकि यह पहले से लागू निलंबनों का विस्तार मात्र है।
फियो ने भारतीय निर्यातकों को वहां के बाजार में अपनी स्थिति उत्पाद के मोटे वर्गीकरण की बजाय यह देख कर करने की सलाह दी है कि उनका उत्पाद शुल्कों की किस श्रेणी (एएच कोड) के अंतर्गत आता है और उस पर वहां शुल्क की दर क्या है।
फियो ने शुक्रवार को जारी एक स्पष्टीकरण में कहा कि जीएसपी लाभ में बदलाव की ईयू की अधिसूचना के अंतर्गत भारत से वहां जाने वाले 87 प्रतिशत मूल्य के माल के शामिल होने की बात कही जा रही है लेकिन " इसका मतलब यह नहीं है कि भारत के 87 प्रतिशत माल पर वहां ऊंचा शुल्क लगेगा ही लगेगा।' फियों के अनुसार इन वर्गों के बहुत से उत्पादों पर वहां एमएफएन (सबसे अधिक वरीयता वाले देश ) की व्यवस्था के तहत शून्य शुल्क लागू है।
फियो के अनुसार एक तो ईयू की यह अधिसूचना मोटे तौर पर वर्गीक़त उत्पादों क श्रेणियों के संबंध है। इन श्रेणियों के बहुत से उत्पादों पर ईयू में एमएफएन व्यवस्था के तहत भारत सहित सभी देशों को शून्य शुल्क पर प्रवेश मिलता है। इसी तरह इन प्रमुख श्रेणियों के बहुत से अलग-अलग उत्पादों को उत्पत्ति के नियम और कुछ शर्तों के साथ अब भी भारत को जीएसपी का लाभ मिलता रहेगा।
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