नयी दिल्ली , जनवरी 22 -- राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (रानावि) की ओर से आयोजित भारत रंग महोत्सव (भारंगम) का 25वां संस्करण इस साल 27 जनवरी से शुरू हो रहा है, जो 20 फरवरी तक चलेगा।
रानावि के उपाध्यक्ष पद्मश्री प्रोफेसर भरत गुप्त ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि यह दुनिया का सबसे बड़ा रंग महोत्सव है।
वहीं निदेशक चित्ररंजन त्रिपाठी ने बताया कि अब तक के सबसे बड़े भारंगम संस्करण को प्रत्येक महाद्वीप के कम से कम एक देश में और भारत के 40 स्थानों पर आयोजित किया जा रहा है। इस कड़ी में यह इस बार दुनियाभर के 14 देशों में यह आयोजित हो रहा है।
उत्सव के दौरान रानावि दिल्ली परिसर में संस्थान के स्तंभ इब्राहिम अल्काजी के जन्मशती वर्ष पर, उनके सम्मान में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया जायेगा और यह महोत्सव थियेटर के दिग्गज रतन थियम, दया प्रकाश सिन्हा, बंसी कौल और आलोक चटर्जी को श्रद्धांजलि समर्पित करेगा, जिनका हाल ही में निधन हो गया है।
इनके अलावा यह महोत्सव भगवान बिरसा मुंडा, लोक माता अहिल्या बाई और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसी हस्तियों को भी याद करेगा। इस मौके पर कैंसर सर्वाइवर और एनएसडी के पूर्व छात्र की लिखित एक विशेष नाट्य प्रदर्शन प्रस्तुत होगी।
भारंगम के लिए इस बार 136 भारतीय और 12 विदेशी नाटकों का चयन किया गया है। शेष आमंत्रित प्रस्तुतियों में 12 अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों सहित 228 भाषाओं और बोलियों में 277 प्रदर्शन शामिल हैं। इसके अलावा महोत्सव में 19 विश्वविद्यालय प्रस्तुतियां और 14 स्थानीय प्रस्तुतियां भी प्रदर्शित की जायेंगी।
संवाददाता सम्मेलन में प्रो गुप्त ने बताया, "भाषाओं का व्यापक समावेश और भारत रंग महोत्सव 2026 की व्यापक पहुंच इसे भाषाई विविधता के मामले में दुनिया के सबसे बड़े थियेटर महोत्सव के रूप में स्थापित करेगा।
इस वर्ष लगभग सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं और कई आदिवासी तथा लुप्तप्राय भाषाओं के साथ-साथ तुलु, उर्दू, ताई खामती और नईशी को भारंगम में शामिल किया गया है। इतना ही नहीं इस बार कई जगहों पर भारंगम पहली बार आयोजित हो रहा है, इनमें लद्दाख, लक्षद्वीप और अंडमान भी शामिल हैं।
एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा, "यह सर्व-समावेशी, गैर-अभिजात्य अंतरराष्ट्रीय थियेटर महोत्सव है। यहां, भाषाओं, शेरों, सौंदर्यशास्त्र और विचारधाराओं का एक विशाल संगम देखने को मिलेगा। नाटक के विभिन्न रूपों और शैलियों के माध्यम से लेकर लोक परंपराओं को एक साथ लाने का प्रयास है।
उन्होंने यह भी कहा, "मुझे खुशी है कि हम इस थियेटर समारोह को राष्ट्रीय राजधानी से दूर के भारतीय शहरों में भी आयोजित कर रहे हैं। ऐसे स्थानों पर, जहां लोगों का थियेटर तक पहुंच बहुत सीमित है या कुछ मामलों में तो बिल्कुल भी नहीं है।"25वें भारत रंग महोत्सव में क्यूरेटेड और संबद्ध थिएटर उत्सवों की एक विस्तृत शृंखला को इस बार शामिल किया जा रहा है। इसमें आदिरंग महोत्सव (आदिवासी थियेटर, नृत्य और शिल्प), जश्ने बचपन (बच्चों का थियेटर उत्सव), बाल संगम (बच्चों का लोक नृत्य और नाटक), पूर्वोत्तर नाट्य समारोह, कठपुतली थियेटर महोत्सव, नृत्य नाटक महोत्सव, संस्कृत नाटकों की विशेषता वाला शास्त्रीय नाटक महोत्सव और लघु-प्रारूप प्रस्तुतियों का प्रदर्शन करने वाला 'माइक्रो ड्रामा' महोत्सव शामिल है।
निदेशक त्रिपाठी ने बताया, "इतना ही नहीं पहली बार हाशिये के समुदायों को भी हमने इस रंग महोत्सव में शामिल किया है। इसमें ट्रांसजेंडर समुदायों, यौनकर्मियों, वरिष्ठ नागरिकों और अन्य कम प्रतिनिधित्व वाले सामाजिक समूह भी अपनी नाट्य प्रस्तुतियां पेश करेंगे।
महोत्सव में थियेटर बाजार खंड भी शामिल किया गया है। इसमें नये लिखे नाटकों को आमंत्रित किया जायेगा और सर्वश्रेष्ठ कार्य को पुरस्कृत और प्रकाशित भी किया जायेगा। 'श्रुति' के तहत, 17 नयी प्रकाशित पुस्तकें लोकार्पित की जायेंगी।
रंग महोत्सव की खास बातों में यह भी है कि कोई विशिष्ट श्रेणी न होने के बावजूद महिला निर्देशकों की 33 प्रस्तुतियां इस बार देखने को मिलेगी।
भारंगम में पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने वाली पहलों के साथ-साथ भारत की विविध पाक परंपराओं पर प्रकाश डालने वाले विशेष काउंटर भी होंगे।
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