जयपुर , फरवरी 12 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम पर गुरुवार को विधानसभा में राज्य सरकार के बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि जब से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार आई है, तब से इसकी प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य शामिल ही नहीं है जबकि अब तक इस अधिनियम को लागू कर देना चाहिए था।

श्री गहलोत ने गुरुवार को यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि ये लोग चिरंजीवी योजना को भी नहीं समझ पाए, फ्री मेडिसिन को नहीं समझ पाए। आज स्वास्थ्य की चिंता हर घर और हर गांव में होती है। यह समझ से परे है कि फ्री मेडिसिन, फ्री जांच, फ्री इलाज और फ्री ऑपरेशन जैसी योजनाएं ,25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा , हिंदुस्तान के किसी भी राज्य में नहीं है, और शायद दुनिया में भी नहीं होगा।

उन्होंने कहा " फ्री और कैशलेस इलाज की जो योजना हमने शुरू की, वह पूरे देश में लोकप्रिय हुई। कई राज्यों ने किसी न किसी रूप में इसे अपनाया, इसके बारे में यदि मंत्री जी या सरकार ने जो बात कही है वो दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया जाना चाहिए था।

श्री गहलोत ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी हमने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोले, लेकिन उन्हें भी कमजोर कर दिया गया। इनकी प्राथमिकता में शिक्षा भी नहीं है। हम हिंदी के पक्षधर हैं, लेकिन आज दुनिया अंग्रेजी से जुड़कर आगे बढ़ी है। मोबाइल फोन, आईटी और कंप्यूटर का युग है। बच्चों का भविष्य बनाना है तो अंग्रेजी शिक्षा भी जरूरी है लेकिन सरकार की प्राथमिकताओं में न सिंचाई है, न पानी, न बिजली, न शिक्षा, न स्वास्थ्य और न सड़कें।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित