जयपुर , मार्च 18 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के 'भर्ती कैलेंडर' को महज एक कागजी छलावा करार देते हुए कहा है कि यह प्रदेश के लाखों युवाओं के साथ एक क्रूर मजाक साबित हुआ है।
श्री गहलोत ने बुधवार को अपने बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए समय पर भर्तियां कराने का दंभ भरती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि समान पात्रता परीक्षा (सीईटी) के आयोजन में विफलता के कारण आज प्रदेश के 20 लाख से अधिक बेरोजगार युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है। पिछली पात्रता की अवधि समाप्त हो चुकी है और नई परीक्षा का कोई अता-पता नहीं है, जिसके चलते कांस्टेबल और ग्राम विकास अधिकारी जैसी 23 महत्वपूर्ण नई भर्तियां अब सीधे एक साल के लिए अटक गई हैं।
उन्होंने कहा कि नियमों में बदलाव और 'मंथन' के नाम पर राज्य सरकार की सुस्ती ने चयन बोर्ड को पंगु बना दिया है, जिससे युवाओं के सामने ओवरएज होने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हमारी सरकार ने हमेशा युवाओं को संबल देने का काम किया था, लेकिन वर्तमान सरकार की प्रशासनिक अक्षमता और दिशाहीनता ने राजस्थान के प्रतिभावान युवाओं को सड़कों पर भटकने के लिए मजबूर कर दिया है।
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