नयी दिल्ली , मार्च 23 -- केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने सोमवार को कहा कि चुनाव आयोग के दस्तावेज़ के गलत प्रसार के संबंध में संबंधित फाइल संभाल रहे सहायक अनुभाग अधिकारी को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है।

केरल के सीईओ कार्यालय ने इस मामले के संबंध में देर शाम एक अतिरिक्त स्पष्टीकरण में यह जानकरी दी। इससे पहले सीईओ कार्यालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर वाले चुनाव आयोग के दस्तावेज़ के गलत प्रसार के संबंध में स्पष्टीकरण में कहा था, ' यह हमारे संज्ञान में आया है कि चुनाव आयोग का एक पत्र, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर लगी हुई है, विभिन्न मलयालम समाचार चैनलों पर प्रसारित किया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) का कार्यालय यह स्पष्ट करता है कि यह पूरी तरह एक लिपिकीय त्रुटि थी, जिसे तुरंत पहचानकर सुधार लिया गया।"भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्यसभा सांसद संदोष कुमार पी ने आज ही एक बयान में इस प्रकरण को लेकर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है और आयोग के दस्तावेज पर भारतीय जनता पार्टी की मुहर पाये जाने के मामले की जांच करा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

केरल सीईओ कार्यालय ने स्पष्टीकरण में कहा है, ' केरल में भाजपा इकाई ने हाल ही में 2019 के दिशा-निर्देशों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था, जो उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास के प्रकाशन से संबंधित हैं। अपने अनुरोध के साथ, पार्टी ने 2019 के मूल निर्देश की एक फोटोकॉपी भी प्रस्तुत की थी। उस विशेष प्रति पर पार्टी की मुहर मौजूद थी।'सीईओ कार्यालय ने कहा है, ' एक चूक के कारण कार्यालय इस दस्तावेज़ पर लगे पार्टी चिह्न को पहचान नहीं पाया और अनजाने में इसे अन्य राजनीतिक दलों को भी स्पष्टीकरण के हिस्से के रूप में भेज दिया। उल्लेखित दिशा-निर्देश 2019 के बाद संशोधित किए जा चुके हैं, जिसकी जानकारी पहले ही सभी राजनीतिक दलों को दी जा चुकी है।'कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही यह त्रुटि सामने आई, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने इसे स्वीकार किया। इसके परिणामस्वरूप, 21 मार्च को उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक औपचारिक पत्र जारी कर इस गलत दस्तावेज़ को वापस ले लिया। यह वापसी सूचना सभी राजनीतिक दलों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को भेजी गई।

राज्य के सीईओ कार्यालय ने जनता और मीडिया से अनुरोध किया है कि इस लिपिकीय त्रुटि के आधार पर भ्रामक संदेशों का प्रसार न किया जाय।

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