इंदौर , जनवरी 21 -- मध्यप्रदेश में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से उत्पन्न गंभीर स्थिति के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आ गया है। निगम ने वर्षों से बंद पड़ी अपनी वॉटर टेस्टिंग लैब को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे अब शहर में सप्लाई होने वाले पानी की शुद्धता की जांच निगम अपने स्तर पर कर सकेगा।

नगर निगम सूत्रों के अनुसार इंदौर निगम के पास पहले एक आधुनिक जल परीक्षण प्रयोगशाला थी, जहां नियमित रूप से पेयजल के नमूनों की जांच की जाती थी। लेकिन समय के साथ विशेषज्ञ कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने और स्थानांतरण के बाद नई भर्तियां नहीं होने से यह लैब बंद हो गई थी। वर्तमान में निगम केवल साप्ताहिक जल सुनवाई के माध्यम से ही पानी से जुड़ी शिकायतों का निपटारा कर रहा था।

भागीरथपुरा की घटना के बाद निगम ने लैब को पुनः क्रियाशील करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए केमिस्ट और जल विशेषज्ञों के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं। लैब के शुरू होने के बाद शहर की सभी 105 पानी की टंकियों से नियमित अंतराल पर सैंपल लेकर जांच की जाएगी। इससे पानी की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और किसी भी प्रकार के प्रदूषण या लीकेज की समय रहते पहचान हो सकेगी।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि भागीरथपुरा की घटना निगम के लिए चेतावनी है। नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना निगम की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से वॉटर टेस्टिंग लैब को फिर से शुरू किया जा रहा है और विशेषज्ञों की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। आने वाले समय में शहर की सभी जल टंकियों की नियमित मॉनिटरिंग इसी लैब के माध्यम से की जाएगी।

नगर निगम के इस फैसले से शहरवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब पानी की गुणवत्ता जांच के लिए बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी और निगम की सीधी निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी।

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