मुंबई , फरवरी 08 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को भारतीयों से देश के और बंटवारे का डर छोड़ने और इसके बजाय 2047 तक एक एकजुट और मजबूत भारत देखने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
यहां आरएसएस शताब्दी समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित एक बातचीत कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने जातिगत विभाजन से लेकर कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) तक कई मुद्दों पर बात की।
उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें भारत के बंटवारे की इच्छा रख सकती हैं, लेकिन ऐसे मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, "सुल्तानों और सम्राटों ने 500 साल तक भारत पर राज किया और अंग्रेजों ने 200 साल तक। जो वे तब हासिल नहीं कर सके, वह भविष्य में विभाजनकारी ताकतें भी हासिल नहीं कर पाएंगी।"संघ प्रमुख ने आरएसएस के पूर्व प्रमुख बालासाहेब देवरस के विचारों को याद करते हुए कहा कि संघ ने आरक्षण पर सभी संवैधानिक प्रावधानों का समर्थन किया है। आरक्षण तब तक जरूरी है जब तक जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता सच में खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यह भावना कि जातिगत भेदभाव खत्म हो गया है, उन लोगों से आनी चाहिए जिन्होंने इसे सहा है और कहा कि कुछ लोगों ने स्वेच्छा से अपने आरक्षण के लाभ छोड़ दिए हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
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