जालौन , फरवरी 19 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में गुरुवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने लघु सिंचाई विभाग में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग उठाई। भाकियू के जिला प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह गौर ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि सहायक अभियंता सुरेंद्र सिंह जादौन द्वारा अपनी फर्म और कथित रूप से करीबी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां उनकी तैनाती होती है, संबंधित फर्म को साथ ले जाकर कार्य कराए जाते हैं और भुगतान सुनिश्चित कराया जाता है।
प्रवक्ता के अनुसार यह मामला लंबे समय से चली आ रही कार्यशैली का हिस्सा है और इसमें अधिशासी अभियंता व अधीक्षण अभियंता स्तर तक की संलिप्तता की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि लघु सिंचाई खंड, जालौन में किसानों के नाम पर संचालित योजनाओं में करोड़ों रुपये के धन के दुरुपयोग की संभावना है।
भाकियू ने आरोप लगाया कि किसानों से कोरे कागजों और प्रारूपों पर हस्ताक्षर कराकर अधिकार-पत्रों के माध्यम से चयनित फर्मों के नाम भुगतान निकाले गए। रिंग मशीनों के पंजीकरण और उपयोग को लेकर भी अनियमितता का आरोप लगाया गया। संगठन का कहना है कि मशीनों के फोटोग्राफ, भुगतान विवरण और स्थल निरीक्षण से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बोरिंग सामग्री की खरीद में भी नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है। केंद्र सरकार के प्रोक्योरमेंट मैनुअल 2022 और राज्य शासन के नियमों के विपरीत जैम पोर्टल से खरीद न करने की बात कही गई। प्री-ग्रेविल सामग्री की आपूर्ति और गहराई मानकों में भी कथित गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया।
इसके अतिरिक्त 50 प्रतिशत कृषक अंश और 50 प्रतिशत अनुदान की राशि के समान व्यय न होने, समरसेबिल पम्प क्रय में अनियमितता तथा आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की स्वतंत्र जांच न कराने के आरोप भी लगाए गए।
प्रवक्ता ने बताया कि 21 जून 2025 और एक जुलाई 2025 को शासन को विस्तृत शिकायत भेजी गई थी तथा सतर्कता विभाग या आर्थिक अपराध शाखा से समयबद्ध जांच की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भाकियू ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
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