पटना, मार्च 21 -- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा माले) ने 23 मार्च से 31 मार्च तक पूरे देश में युद्ध-विरोधी तथा साम्राज्यवाद-विरोधी अभियान सप्ताह मनाने की घोषणा की है।

भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि यह अभियान भगत सिंह के शहादत दिवस (23 मार्च) से लेकर चंदू के शहादत दिवस (31 मार्च) तक चलाया जाएगा, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम और जनसंघर्षों की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा हुआ है। इस दौरान देशभर में सभाएं, जुलूस, जनसंवाद, प्रतिरोध मार्च और विविध जनकार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युद्ध के खतरों, साम्राज्यवादी हस्तक्षेप और शांति, न्याय एवं जनतंत्र के सवालों को व्यापक रूप से जनता के बीच उठाया जाएगा।

श्री भट्टचार्य ने अमेरिका-इजरायल की ओर से ईरान पर किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और साम्राज्यवादी आक्रामकता बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजरायल के इस हमले ने पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंकने का खतरा पैदा कर दिया है।उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति, अर्थव्यवस्था और मानवता के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।तेल और संसाधनों पर नियंत्रण की होड़ इस युद्ध को और खतरनाक बना रही है।

भाकपा माले ने देश की तमाम लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और शांति-प्रिय ताकतों से अपील की है कि वे इस अभियान सप्ताह में सक्रिय भागीदारी करें और युद्ध एवं साम्राज्यवादी दखल के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करें।

भाकपा नेता ने कहा कि आज जरूरत है कि शहीदों की विरासत से प्रेरणा लेकर हम युद्ध, हिंसा और साम्राज्यवाद के खिलाफ एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा करें और दुनिया में शांति, न्याय और संप्रभुता की रक्षा के लिए आगे आयें।

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