हैदराबाद , नवंबर 19 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार पर माओवादी नेताओं को निशाना बनाकर कथित फर्जी मुठभेड़ों की एक श्रृंखला चलाने आरोप लगाया तथा तत्काल इसकी न्यायिक जांच और कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने की मांग की।

भाकपा के तेलंगाना प्रदेश सचिव एवं विधायक कुनामनेनी संबाशिवा राव ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में केंद्र पर माओवादी विरोधी अभियानों की आड़ में 'मुठभेड़ के जरिये हत्याओं' को प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि श्री बंडी संजय को यह भी नहीं पता कि मुठभेड़ क्या होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा बल 'ऑपरेशन कगार' के नाम पर मनमाने ढंग से लोगों को पकड़ रहे हैं और मार रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि शीर्ष माओवादी नेता हिडमा की हालिया हत्या 'गैरकानूनी, पूर्व नियोजित हमलों' का सबूत है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार 'लोकतंत्र की हत्या' कर रही है। उन्होंने पिछले तीन वर्षों में माओवादी विरोधी अभियानों में हुई मौतों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की और दावा किया कि इस अवधि में 1,200 से अधिक लोग मारे गए।

उन्होंने कहा कि रिपोर्टों से पता चलता है कि माओवादी नेता देवजी उर्फ तिरुपति पुलिस हिरासत में हो सकते हैं। हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति को बिना किसी देरी के अदालत में पेश किया जाना चाहिए। सभी वामपंथी दल गुरुवार को बुद्धिजीवियों के साथ गोलमेज बैठक करेंगे और अपनी सामूहिक कार्रवाई की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ एक कानूनी और जन आंदोलन का संकल्प लिया।

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