चंडीगढ़ , जनवरी 27 -- पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं विधायक परगट सिंह ने मंगलवार को कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ विवादास्पद एसवाईएल नहर मुद्दे पर हुई अपनी हालिया मुलाकात के दौरान निस्वार्थ सेवा और मानवता के प्रतीक भाई कन्हैया जी के संबंध में टिप्पणी की है, जो बहुत खेदजनक है।
उन्होंने कहा कि यह एक बेहद खेदजनक घटना है, जिसने सिख समुदाय की सामूहिक अंतरात्मा को ठेस पहुंचाई है।
श्री सिंह ने कहा कि एक ऐसे संत का इस तरह से अपमान करना, जिनकी करुणा ने सभी भेदभावों को पार कर लिया था, न केवल अनुचित है बल्कि सिखधर्म की आध्यात्मिक भावना का घोर अपमान है। सिख इतिहास के महान व्यक्तित्व भाई कन्हैया जी ने 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान युद्ध के मैदानों में निस्वार्थ भाव से घायल सैनिकों की सेवा की, मित्र-शत्रु का भेदभाव किये बिना जल और अन्य सहायता प्रदान की। सिख धर्मग्रंथों और परंपराओं में अमर उनकी विरासत सार्वभौमिक करुणा, सेवा और गुरु गोविंद सिंह जी की शिक्षाओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है। अंतरराज्यीय जल विवादों के राजनीतिक विवाद में इस पवित्र स्मृति को घसीटना, पंजाब के एसवाईएल नहर के कड़े विरोध के बीच इसे एक बयानबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना, लाखों लोगों द्वारा संजोए गए प्रतीक का अपमान है। इस प्रकार की टिप्पणियां भाई कन्हैया जी के योगदान के महत्व को कम करती हैं और सिख पंथ की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाती हैं, जहां एकता और सम्मान सर्वोपरि हैं वहां विभाजन को बढ़ावा देती हैं।
श्री सिंह ने कहा कि एसवाईएल नहर पर पंजाब का रुख दृढ़ और सैद्धांतिक है, " हमारे राज्य का अस्तित्व रावी-ब्यास नदी के हर एक बूंद पानी पर निर्भर है, जो हमारी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था, किसानों की आजीविका और तीन करोड़ से अधिक पंजाबियों की समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। "उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों, उच्चतम न्यायालय की टिप्पणियों और पर्यावरणीय अनिवार्यताओं पर आधारित इस स्थिति के लिए सशक्त समर्थन की आवश्यकता है, न कि हल्के-फुल्केपन या ऐतिहासिक उपमाओं की, जो प्रतिष्ठित हस्तियों का उपहास उड़ाती हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मान का बैठक में आचरण न केवल पंजाब की विश्वसनीय वार्ताओं को कमजोर करता है, बल्कि इस दीर्घकालिक विवाद में हमारे नैतिक वर्चस्व को भी धूमिल करता है।
श्री सिंह ने इन टिप्पणियों की स्पष्ट रूप से निंदा करते हुए इन्हें राज्य के सर्वोच्च पद के लिए अशोभनीय बताया है। ये टिप्पणियां ऐसे समय में सांस्कृतिक संवेदनशीलता के प्रति लापरवाही का भाव दर्शाती हैं, जब पंजाब हरियाणा और केंद्र के साथ रचनात्मक संवाद चाहता है। आम आदमी पार्टी सरकार का ठोस शासन के बजाय नाटकीय बयानबाजी पर जोर देना क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाता है और उन समुदायों को अलग-थलग करता है जो गरिमा और मर्यादा की उम्मीद रखने वाले नेतृत्व की ओर देखते हैं।
श्री सिंह ने श्री मान से आग्रह किया है कि वे तत्काल सार्वजनिक माफी मांगें, अपने बयान वापस लें और विभाजनकारी अतिशयोक्ति के बजाय तर्कसंगत बातचीत के माध्यम से एसवाईएल गतिरोध को सुलझाने के लिए फिर से प्रतिबद्ध हों।
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