जयपुर , जनवरी 20 -- राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) द्वारा आयोजित सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा 2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा 2018 एवं कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा 2018 में फर्जीवाड़ा कर परीक्षा परिणाम को दूषित किये जाने के मामले में पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) ने बोर्ड के तत्कालीन उपनिदेशक (सिस्टम एनालिस्ट) संजय माथुर एवं बोर्ड के प्रोगामर प्रवीण गंगवाल सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि एसओजी के उपमहानिरीक्षक परीस देशमुख के पर्यवेक्षण में अनुसंधान अधिकारी यशवंत सिंह द्वारा की गयी जांच के बाद इस प्रकरण में संजय माथुर, प्रवीण, शादान खान, विनोद कुमार गौड़ एवं पूनम माथुर को गिरफ्तार किया गया है।
श्री बंसल ने बताया कि वर्ष 2019 में आयोजित इन तीनों भर्ती परीक्षाओं में 3212 पदों के लिए नौ लाख 40 हजार 38 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। परीक्षा परिणाम तैयार करने के लिए ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग एवं डाटा प्रोसेसिंग का गोपनीय कार्य आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड नई दिल्ली को सौंपा गया था। अनुसंधान में सामने आया कि फर्म के कार्मिको के द्वारा ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग के पश्चात कंप्यूटर सिस्टम में वास्तिक डाटा से छेड़छाड कर चुनिंदा अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों में कूटरचना के माध्यम से अनुचित वृद्धि की गई। जिससे अयोग्य अभ्यर्थियों को चयनित कराया गया। बोर्ड द्वारा मूल ओएमआर शीट्स की पुन: स्कैनिंग कराने पर परीक्षा परिणाम में गंभीर विसंगतियां पायी गयी।
उन्होंने बताया कि अनुसंधान के दौरान उजागर हुआ कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ तत्कालीन सिस्टम एनालिस्ट कम प्रोग्रामर (उपनिदेशक)एवं तकनीकी प्रमुख संजय माथुर जो संपूर्ण ओएमआर स्कैनिंग एवं परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया के प्रभारी थे, इस आपराधिक षड़यंत्र में सक्रिय रुप से शामिल थे। उनके द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्कैनिंग टीम एवं आउटसोर्स फर्म के कार्मिकों से मिलीभगत कर अपने परिचित अभ्यर्थियों को अवैध लाभ पहुंचाया गया।
श्री संजय माथुर एवं सह आरोपियों द्वारा ओएमआर शीट्स की स्कैन कॉपी में फोटोशाॅप के माध्यम से सही उत्तर अंकित कर अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों को अत्यधिक बढ़ाया गया। उदाहरण के रूप में अभियुक्त पूनम माथुर को वास्तविक रूप से लगभग 63 अंक प्राप्त होने थे, जबकि फर्जीवाड़े के माध्यम से परीक्षा परिणाम में उसे 182 अंक दर्शाये गये। इसी प्रकार अन्य अभ्यर्थियों के भी वास्तविक 30 से 50 अंकों को बढ़ाकर 185 से अधिक अंक दिखाये गये। जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जीवाड़े की जांच के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा गठित प्रशासनिक समिति में मुख्य सूत्रधार संजय माथुर एवं प्रवीण गंगवाल को भी सदस्य बनाया गया था, जिससे जांच प्रकिया को प्रभावित करने का प्रयास भी किया गया।
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