जयपुर , दिसंबर 13 -- देश के ऊर्जा परिदृश्य में आ रहे बदलाव (एनर्जी ट्रांजिशन) में राजस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में गत दो वर्ष में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत निर्णय करने से राजस्थान देश का सोलर हब बनता जा रहा है।
राज्य की भजलाल सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि निवेश की राह में आने वाली बाधाओं को दूर कर सौर परियोजनाओं को गति दी गई है। भूमि आवंटन की प्रक्रियाओं को सुगम बनाया गया है। जिससे परियोजनाएं समय से पूरी हो रही हैं और प्रदेश सौर ऊर्जा की रोशनी से दमक रहा है।
राज्य की वर्तमान स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता 41 हजार 189 मेगावाट तथा सौर ऊर्जा क्षमता 35 हजार 337 मेगावाट पहुंच चुकी है। देश की कुल सौर ऊर्जा क्षमता में राजस्थान की भागीदारी 27.2 प्रतिशत और अक्षय ऊर्जा में 16.43 प्रतिशत है। बीते दो वर्षों में राज्य की अक्षय ऊर्जा क्षमता में 17 हजार 820 मेगावाट की वृद्धि हुई है। जिसमें सौर ऊर्जा का योगदान 17 हजार 326 मेगावाट है। इसके अतिरिक्त 45 गीगावाट क्षमता की अक्षय ऊर्जा परियोजनाएं प्रगति पर हैं। राजस्थान इस प्रगति से देश के सोलर हब के रूप में मजबूती से उभर रहा है।
सौर ऊर्जा में राजस्थान के बढ़ते प्रभुत्व के पीछे सोलर पार्कों तथा सौर परियोजनाओं के साथ-साथ पीएम-कुसुम एवं पीएम सूर्यघर जैसी योजनाओं का ठोस क्रियान्वयन भी है। इन योजनाओं से राज्य में विकेन्द्रित सौर ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा मिला है। कुसुम योजना के कम्पोनेंट-ए एवं कम्पोनेंट-सी के अन्तर्गत बीते दो वर्ष में प्रदेश की गांव-ढ़ाणियों में दो हजार 345 मेगावाट क्षमता से अधिक की ग्रिड कनेक्टेड एक हजार 47 लघु सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इस दृष्टि से राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। इसी तरह कम्पोनेंट-बी में 51 हजार 927 (कुल 1.15 लाख) ऑफ ग्रिड सोलर पम्प स्थापित किए जा चुके हैं। इस योजना के माध्यम से किसान अब डीजल पंपों के प्रदूषण से मुक्ति पा रहे हैं और सस्ती सौर ऊर्जा को अपना रहे हैं। ग्रिड कनेक्टेड संयंत्रों से करीब एक लाख 54 हजार से अधिक किसानों को खेती के लिए दिन में बिजली मिल रही है।
इसी तरह पीएम सूर्यघर योजना में दो वर्ष से भी कम समय में प्रदेश में 441 मेगावाट क्षमता के एक लाख 9 हजार 209 रूफ टॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। पीएम सूर्यघर में स्थापित रूफ टॉप सौर ऊर्जा संयंत्रों की संख्या के आधार पर राजस्थान देश में पांचवें स्थान पर है।
स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 के तहत राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा तथा 10 गीगावाट की ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बीकानेर के पूगल में पांच हजार मेगावाट ऑवर बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता के साथ 2 हजार 450 मेगावाट क्षमता का देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश से करीब छह हजार मेगावाट ऑवर क्षमता की 4 बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। जिनमें देश में न्यूनतम टैरिफ प्राप्त हुई है। इस प्रकार राज्य में वृहद् क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज तंत्र विकसित किया जा रहा है। नवम्बर 2027 तक स्थापित होने वाली इन परियोजनाओं से पीक ऑवर्स की डिमांड को पूरा किया जा सकेगा और महंगी बिजली खरीद से मुक्ति मिलेगी। ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने में यह बड़ा कदम साबित होगा।
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