नयी दिल्ली , मार्च 26 -- ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बड़ा झटका देते हुए उसके भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर फिर से सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के ताजा आश्वासनों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया।

लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस की खंडपीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए फैसले में कहा कि अपील को दोबारा खोलने के लिए 'असाधारण परिस्थितियों' की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर अपील को फिर से शुरू करने का कोई ठोस कारण नहीं है। यह निर्णय लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनाया।

गौरतलब है कि नीरव मोदी की याचिका मुख्य रूप से 2025 के एक अन्य अदालती फैसले पर आधारित थी, जिसमें भारत में पूछताछ के दौरान खराब व्यवहार की आशंका जताई गई थी। ब्रिटिश अदालत ने सुनवाई करते कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच "व्यापक, विस्तृत और विश्वसनीय" आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं की जाएगी।

भारतीय राजनयिक आश्वासनों के अनुसार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य भारतीय जांच एजेंसी को ब्रिटेन के अधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना नीरव मोदी से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि ये वादे राजनयिक स्तर पर बाध्यकारी हैं और यह मानने का कोई आधार नहीं है कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत कार्य करेगा।

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