औरंगाबाद , अक्क्टूबर 26 -- बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल देव में त्रेतायुगीन सूर्य मंदिर का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था।
देव सूर्य मंदिर अपनी कलात्मक भव्यता के लिए सर्वविदित और प्रख्यात होने के साथ ही सदियों से देशी- विदेशी पर्यटकों, श्रद्धालुओं और छठव्रतियों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की अभूतपूर्व स्थापत्य कला, शिल्प, कलात्मक भव्यता और धार्मिक महत्ता के कारण ही जनमानस में यह किंवदति प्रसिद्ध है कि इसका निर्माण देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं अपने हाथों से किया है। देव स्थित भगवान भास्कर का विशाल मंदिर अपने अप्रतिम सौंदर्य और शिल्प के कारण आकर्षण का केंद्र है। देव सूर्य मंदिर ही एक ऐसा सूर्य मंदिर है जिसका मुख्य दरवाजा पश्चिमामुख है।
विश्व प्रसिद्ध देव सूर्य मंदिर में छठ करने लाखों की संख्या में छठ व्रती पहुंचते हैं। इस दौरान भगवान सूर्य के त्रिमूर्ति स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। भगवान सूर्य का यह त्रिमूर्ति मंदिर पूरे विश्व में सिर्फ़ एक ही है। इस मंदिर की ख्याति से देश भर के कोने कोने से लोग चार दिवसीय महापर्व छठ व्रत को करने के लिए आते हैं।देव सूर्य मंदिर में भगवान सूर्य पालनकर्ता, संहारकर्ता और सृष्टि कर्ता के रूप में विराजमान हैं।इस मंदिर में पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यहां चार दिवसीय छठ मेले का आयोजन भी किया जाता है।
मंदिर के निर्माणकाल के संबंध में उसके बाहर ब्रह्म लिपि में लिखित और संस्कृत में अनुवादित एक श्लोक जड़ा है, जिसके अनुसार 12 लाख 16 हजार वर्ष त्रेता युग के बीत जाने के बाद इलापुत्र पुरूरवा ऐल ने देव सूर्य मंदिर का निर्माण आरंभ करवाया। शिलालेख से यह भी पता चलता है कि साल 2016 में इस पौराणिक मंदिर के निर्माण काल का एक लाख पचास हजार सोलह वर्ष पूरा हो गया है।देव मंदिर में सात रथों से सूर्य की उत्कीर्ण प्रस्तर मूर्तियां अपने तीनों रूपों- उदयाचल-प्रात: सूर्य, मध्याचल- मध्य सूर्य और अस्ताचल -अस्त सूर्य के रूप में विद्यमान है। पूरे देश में देव का मंदिर ही एकमात्र ऐसा सूर्य मंदिर है जो पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिमाभिमुख है।
करीब एक सौ फीट ऊंचा यह सूर्य मंदिर स्थापत्य और वास्तुकला का अदभुत उदाहरण है। बिना सीमेंट अथवा चूना-गारा का प्रयोग किये आयताकार, वर्गाकार, अर्द्धवृत्ताकार, गोलाकार, त्रिभुजाकार आदि कई रूपों और आकारों में काटे गये पत्थरों को जोड़कर बनाया गया यह मंदिर अत्यंत आकर्षक एवं विस्मयकारी है।
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