जयपुर , अक्टूबर 29 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर राज्यभर में एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक जनजाति गौरव वर्ष के तहत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

श्री शर्मा बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक ले रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इसके तहत आयोजित होने वाली गतिविधियों, नवाचारों और कार्यक्रमों को भव्य रूप से मनाते हुए सफल आयोजन सुनिश्चित किया जाए जिससे भगवान बिरसा मुंडा का प्रेरणादायी जीवन जन-जन तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को प्रत्येक देशवासी तक पहुंचाने के लिए हर वर्ष 15 नवम्बर को जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। इसी के तहत एक नवम्बर से 15 नवम्बर तक राज्य में विभिन्न गतिविधियां एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

श्री शर्मा ने कहा कि कार्यक्रमों के तहत आदि हाट वन धन केन्द्रों और जनजाति कलाकारों के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, जनजाति से संबंधित सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिताएं, जनजाति क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम, ग्रामीण सेवा शिविर, विभिन्न कार्यशालाओं सहित कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक गतिविधि के सफल क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 15 नवम्बर को जनजाति गौरव वर्ष के तहत राज्य स्तरीय कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।

श्री शर्मा ने अधिकारियों को इस आयोजन की तैयारियों के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों में सभी विभागों का आपसी समन्वय एवं सहभागिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, सचिव स्तर पर विभाग द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों की निगरानी की जाये।

श्री शर्मा ने कहा कि जनजाति गौरव वर्ष के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में सभी जिला कलक्टर स्थानीय स्तर के सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सहभागिता से इन कार्यक्रमों का सफल क्रियान्वयन करें। जनजाति क्षेत्र के जिले भी स्वयंसेवी संस्थाओं तथा भामाशाहों के सहयोग से विभिन्न तरह के नवाचारों को प्रोत्साहित करें। साथ ही, भगवान बिरसा मुंडा के जीवन को आमजन तक पहुंचाने के लिए साहित्य का प्रकाशन भी किया जाए।

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