रायबरेली , मार्च 23 -- उत्तर प्रदेश के रायबरेली में इंदिरा नगर कॉलोनी स्थित एक लॉन में आयोजित साप्ताहिक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में कथाव्यास आनंदाश्रम जी महाराज ने कहा कि ब्रह्म ही सत्य है और भागवत कथा जीवन सुधार का महान विज्ञान है।

कथा के चौथे दिन सोमवार को कालाकांकर स्थित सिद्धेश्वर आश्रम से पधारे कथावाचक ने "पिबत भागवतम् रसमालयम्" के माध्यम से प्रवचन देते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि समाज सुधार और व्यक्तित्व उत्थान का दिव्य साधन है।

उन्होंने ध्रुव-नारद संवाद, सुनीति-सुरुचि प्रसंग और ऋषभदेव के उपदेशों का उल्लेख करते हुए भक्ति, तप और सद्कर्मों के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि भगवत कृपा से अल्प ज्ञान भी महान फल प्रदान करता है और शुद्ध भाव ही सर्वोच्च साधना है।

कथाव्यास ने वैदिक परंपरा की छह शुद्धियों कर्ता, मंत्र, द्रव्य, स्थान, काल और भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी शुद्धता से ही पूजा पूर्ण होती है। उन्होंने बाहरी आडंबर के बजाय अंतःकरण की पवित्रता को सच्ची साधना बताया। उन्होंने नारी की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि बिना पत्नी के कोई भी यज्ञ पूर्ण नहीं माना जाता, जिससे गृहस्थ जीवन में स्त्री की गरिमा स्पष्ट होती है।

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