जयपुर , जनवरी 05 -- जयपुर विद्युत वितरण निगम के बाद अब अजमेर डिस्कॉम के ब्यावर तथा अजमेर सर्किल डिफेक्टिव मीटर मुक्त सर्किल हो गये हैं।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने सोमवार को यहां विद्युत भवन में इन दोनों सर्किलों के अधीक्षण अभियन्ताओं को शून्य डिफेक्टिव मीटर सर्किल होने के प्रमाण पत्र सौंपे। इस अवसर पर श्री नागर ने जयपुर डिस्कॉम के पांच सर्किलों -जयपुर जिला वृत्त-दक्षिण, अलवर, टोंक, डीग एवं धौलपुर के अधीक्षण अभियन्ताओं को भी शून्य डिफेक्टिव मीटर सर्किल होने के प्रमाण पत्र प्रदान किये। यह पांचों सर्किल गत दिसम्बर के अन्त में ही शून्य डिफेक्टिव मीटर सर्किल की उपलब्धि अर्जित कर चुके हैं। ब्यावर, टोंक तथा डीग वृत्त ने कृषि सहित सभी श्रेणियों में तथा अजमेर, धौलपुर, अलवर तथा जयपुर जिला वृत्त-दक्षिण ने सिंगल फेज शहरी, सिंगल फेज ग्रामीण तथा थ्री फेज (गैर कृषि) उपभोक्ताओं के खराब विद्युत मीटर बदलने में कामयाबी हासिल की है।

श्री नागर ने सभी अधीक्षण अभियन्ताओं को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। डिफेक्टिव मीटर की समस्या दूर होने से उपभोक्ता सेवाएं बेहतर होगीं और वितरण निगमों की दक्षता बढ़ेगी।

डिस्कॉम अध्यक्ष आरती डोगरा ने बताया कि गत एक वर्ष में जयपुर डिस्कॉम के अभियंताओं, तकनीकी एवं फील्ड स्टाफ ने कड़ी मेहनत, समर्पण, अनुशासन एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर गैर कृषि श्रेणी में सभी 18 सर्किलों को शून्य डिफेक्टिव मीटर मुक्त बनाया है। इससे अजमेर और जोधपुर विद्युत वितरण निगम को भी प्रेरणा मिली है। इस सफलता को आगे भी बनाये रखा जाएगा।

शून्य डिफेक्टिव मीटर होने के बाद इन सर्किलों में उपभोक्ताओं को अब वास्तविक उपभोग के आधार पर बिजली बिल जारी किये जाएंगे, जिससे त्रुटिपूर्ण बिलिंग की शिकायतें कम होंगी। दो महीने से अधिक समय तक मीटर खराब होने पर विद्युत शुल्क में पांच प्रतिशत की छूट दिए जाने का प्रावधान है। जिससे निगम को राजस्व की हानि होती हैं। डिफेक्टिव मीटर्स के कारण जयपुर विद्युत वितरण निगम को वित्तीय वर्ष 2022-23 में 9 करोड़ 41 लाख रुपये तथा वर्ष 2023-24 में पांच करोड़ 41 लाख रुपये उपभोक्ताओं को विद्युत शुल्क में छूट देनी पडी थी। वर्ष 2024-25 में इसे कम कर दो करोड़ चार लाख रुपये के स्तर पर लाया गया और वित्त वर्ष 2025-26 में मात्र 16 लाख रुपये का आर्थिक भार ही वहन करना पड़ा है, जिसे आगामी महीने में शून्य के स्तर पर लाया जाएगा।

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