रामनगर , मार्च 14 -- उत्तराखंड के रामनगर पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय बौद्धिक संपदा अधिकार कार्यशाला आज का समापन हो गया।
कार्यशाला के अंतिम वित्तीय दिवस की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर मोहन चंद पांडे ने गई। उन्होंने आईपीआर की प्रासंगिकता पर जोर दिया तथा बताया कि हमें छोटी-छोटी सृजनात्मकता को संरक्षित करना चाहिए।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ना जाने हमारा कौन सा सृजन अथवा शोध भविष्य में कौन सा आयाम लेकर उत्कृष्टता को प्राप्त कर लेगा कोई नहीं जानता।कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह द्वारा बौद्धिक संपदा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में बताया गया।
उन्होंने बताया कि किस तरह से पहले आईपीआर एक्ट अस्तित्व में आया और अंग्रेजों के जमाने से वर्तमान तक हर दशक में बौद्धिक संपदा अधिकार में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी गई।भविष्य में इसके आने से बौद्धिक संपदा में होने वाले परिवर्तन के बारे में भी बताया गया। उन्होंने अपने वैदुष्यपूर्ण वक्तव्य में कहा कि आगे सृजन करने के लिए शोध एवं नवाचार करने के लिए हमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जमाने को भी साथ लेकर कार्य करना होगा,जो चुनौतीपूर्ण है।
कार्यशाला में डॉ. कामिका चौधरी ने कॉपीराइट के बारे में विस्तृत जानकारी दी । उनके द्वारा बताया गया कि हम किस तरह के प्रयास करके कॉपीराइट ले सकते हैं। अपने सारगर्भित वक्तव्य में कॉपीराइट लेने के तरीकों के बारे में भी बताया । आगे उन्होंने कॉपीराइट के प्रकारों के बारे विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यशाला संयोजक डॉ. पवन टम्टा द्वारा कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। इसमें मंच संचालन डॉ. प्रकाश बिष्ट द्वारा एवं धन्यवाद चीफ प्रॉक्टर प्रो. एसएस मौर्या द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में सहसचिव डॉ. योगेश चंद्र एवं सुभाष चंद्र सहित महाविद्यालय के समस्त अध्यापक, शोधार्थी ,छात्र-छात्राएं एवम् उत्तराखंड के अन्य महाविद्यालयों के प्राध्यापक और शोधार्थी भी उपस्थित रहे।
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