मुंबई , नवंबर 11 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र ऊर्जा नियामक आयोग (एमईआरसी) की अपनी कार्रवाई की ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग बंद करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अश्विन अखंड की पीठ ने कमलाकर रत्नाकर शेनॉय की ओर से पेश याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह याचिका जनहित से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत हित से प्रेरित है, क्योंकि याचिकाकर्ता को एमईआरसी से व्यक्तिगत शिकायत है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक मामले में एमईआरसी के समक्ष उपस्थित हुए थे, जिसमें उनके अनुसार, आयोग ने उनकी सुनवाई ठीक से नहीं की। उन्होंने कहा कि एमईआरसी द्वारा सुनवाई के तरीके में 'बहुत सारी गलतियां' हो रही हैं और पारदर्शिता की कमी सहित गंभीर खामियां हैं।

श्री शेनॉय ने कहा कि 04 सितंबर, 2018 के एक प्रस्ताव द्वारा, एमईआरसी ने कार्यवाही की ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रथा बंद कर दी है। यह स्वप्निल त्रिपाठी बनाम भारत के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देश का उल्लंघन है।

एमईआरसी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता रत्नाकर सिंह ने याचिका का कड़ा विरोध किया और कहा कि एमईआरसी ने अपने आंतरिक उद्देश्यों के लिए कार्यवाही की ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग की यह व्यवस्था की थी और विद्युत अधिनियम 2003 में कार्यवाही की अनिवार्य रिकॉर्डिंग का कोई प्रावधान नहीं है।

श्री सिंह ने कहा, "आयोग के दैनिक कार्यों के संचालन के लिए एक नियम मौजूद है, जिसमें सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग आम जनता के लिए उपलब्ध है और आयोग के समक्ष सुनवाई पूरी तरह से पारदर्शी है।"दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता निजी स्वार्थ से प्रेरित प्रतीत होते हैं क्योंकि उसे एमईआरसी के खिलाफ व्यक्तिगत शिकायत है।

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