छत्रपति संभाजीनगर , जनवरी 19 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय की औरंगाबाद खंडपीठ ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में बीड की एक नर्सिंग छात्रा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
अदालत ने माना कि किसी विशिष्ट प्रत्यक्ष कार्य या अपराधीक मंशा की अनुपस्थिति में केवल प्रेम प्रसंग या शादी से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।
न्यायमूर्ति एस. जी. चपलगांवकर ने आरती सुरेश सोनावने की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला दिया और शिवाजीनगर थाने में दर्ज प्राथमिकी तथा बीड़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित आरोप पत्र को रद्द कर दिया।
यह आपराधिक कार्यवाही एक युवक निलेश के पिता की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। निलेश पुलिस विभाग में भर्ती की तैयारी कर रहा था और कथित तौर पर आरती के साथ प्रेम संबंध में था। शिकायत के अनुसार, निलेश ने 30 नवंबर, 2023 को अपने माता-पिता को इस रिश्ते के बारे में बताया था। वह 20 दिसंबर को परीक्षा देने के लिए बीड गया था और 23 दिसंबर, 2023 को शाम करीब सात बजे मृत पाया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि रिश्ते के कारण याचिकाकर्ता मृतक से बार-बार संपर्क करती थी और उसका आचरण उकसावे के समान था। इसके कारण ही निलेश ने यह आत्मघाती कदम उठाया था। इस आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच के बाद ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
उच्च न्यायालय के समक्ष, बचाव पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि यदि प्राथमिकी और आरोप पत्र की सामग्री को स्वीकार कर लिया जाए, तब भी वे आईपीसी की धारा 107 और 306 के तहत परिभाषित आत्महत्या के उकसावे के लिए आवश्यक तत्वों का खुलासा करने में विफल रहे हैं। यह दलील दी गई कि बीएससी नर्सिंग की छात्रा को अनावश्यक रूप से फंसाया गया था। केवल संबंध और मोबाइल फोन पर बातचीत अपने आप में उकसाने, सहायता करने या साजिश के समान नहीं हो सकती।
बचाव पक्ष ने 'प्रभु बनाम राज्य' सहित हाल के उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि टूटे हुए रिश्तों से जुड़े मामलों में भी आत्महत्या के उकसावे के लिए आपराधिक दायित्व तब तक नहीं थोपा जा सकता जब तक कि जानबूझकर उकसाने या आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाली स्पष्ट सामग्री न हो।
अतिरिक्त लोक अभियोजक ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि एक गवाह के बयान से संकेत मिलता है कि मृतक ने तब आत्महत्या कर ली, जब याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर उससे शादी करने से इनकार कर दिया था।
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