बैतूल , दिसंबर 30 -- मध्यप्रदेश में बैतूल की बडोरा कृषि उपज मंडी में वर्षों से चली आ रही अव्यवस्था पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक कार्रवाई की है। माल उठाव में लापरवाही और मंडी शेड पर अनुचित कब्जा जमाए रखने के आरोप में सोमवार शाम एसडीएम अभिजीत सिंह ने 12 व्यापारियों पर कुल लगभग पांच लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया है। मंडी के इतिहास में यह पहली बार है जब इस स्तर की कड़ी कार्रवाई की गई है, जिससे पूरे मंडी परिसर में हड़कंप मच गया।
एसडीएम अभिजीत सिंह ने बताया कि जुर्माना प्रति क्विंटल 10 रुपये प्रतिदिन की दर से निर्धारित किया गया है। इनमें से तीन बड़े व्यापारियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि व्यापारियों द्वारा खरीदी गई उपज लंबे समय से मंडी के शेड में रखी हुई थी, जबकि किसान अपनी फसल खुले आसमान के नीचे रखने को मजबूर थे। इससे विशेषकर बारिश के मौसम में किसानों की उपज को भारी नुकसान उठाना पड़ता रहा, लेकिन अब तक इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
किसानों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मंडी के शेडों पर वर्षों से व्यापारियों का कब्जा बना हुआ है, जबकि किसान खुले मैदान में अनाज डालने को मजबूर हैं। किसानों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं पर पहले ध्यान नहीं दिया गया।
दूसरी ओर व्यापारियों ने जुर्माने का विरोध करते हुए भुगतान से इनकार कर दिया है। व्यापारी संघ अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि मंडी की भंडारण क्षमता सीमित है और उपज की आवक लगातार बढ़ रही है। रेलवे रैक की अनुपलब्धता और वेयरहाउस भरे होने के कारण माल उठाव में कठिनाइयां आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि रात में माल उठाव का प्रयास किया जाता है, लेकिन दिन में किसानों की भीड़ के कारण ट्रकों की आवाजाही संभव नहीं हो पाती।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर शाम कलेक्टर, एसडीएम और मंडी सचिव के बीच बैठक हुई, जिसमें मंडी संचालन और माल उठाव व्यवस्था को दुरुस्त करने पर चर्चा की गई। जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भी कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं। इसके बाद कलेक्टर ने नागपुर रेलवे अधिकारियों से रैक उपलब्ध कराने को लेकर बातचीत की है। यह कार्रवाई जहां किसानों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आई है, वहीं मंडी व्यवस्था में सुधार की दिशा में इसे एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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