रायपुर , नवंबर 02 -- छत्तीसगढ़ के वन और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि सांस्कृतिक परम्पराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और छत्तीसगढ़ व देश के संत-महात्माओं व महापुरुषों की स्मृतियों से गौरवान्वित राज्योत्सव के रजत जयंती वर्ष के मौके पर भी कांग्रेस रूदाली-रोदन की अपनी नियति से उबर नहीं पाई।
श्री कश्यप ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की पत्रकार वार्ता पर तीखा पलटवार करते हुए नसीहत दी कि श्री बैज को अपनी याददाश्त दुरुस्त करने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए अन्यथा उथले बयानों से बैज और कांग्रेस, दोनों की जग हँसाई होते देर नहीं लगेगी।
श्री कश्यप ने कहा कि श्री बैज को रूदाली-प्रलाप करने से पहले अपने शासनकाल की वादाखिलाफी को ध्यान में रखना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वादों और मोदी की गारंटी पर सवाल उठाने का तो श्री बैज को कोई नैतिक अधिकार ही नहीं है। सन 2018 के चुनाव में छत्तीसगढ़ से छत्तीस वादे करके उन वादों से साफ मुकरकर प्रदेश की जनता से छलकपट करने वाली कांग्रेस आज भाजपा के वादों पर ज्ञान बाँटने की निर्लज्जता का प्रदर्शन कर रही है। खुद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2018 में छत्तीसगढ़ में घूम-घूमकर फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने, किसानों का प्रति एकड़ २० क्विंटल धान खरीदने का वादा किया था, पर प्रदेश में सरकार में बनने के बाद राहुल गांधी ने न तो इस बारे में एक शब्द कहा, न ही प्रदेश सरकार को तलब किया। पूर्ण शराब बंदी का वादा तो भ्रष्टाचार के दलदल में धँस गया, रोजगार के नाम पर पीएससी का घोटाला कर दिया, महिलाओं को 500 रुपए प्रतिमाह देने का वादा किया पर फूटी कौड़ी नहीं दी, बेरोजगारी भत्ता के नाम पर युवा बेरोजगारों के साथ छल किया। तब बैज मुँह में दही अमाए क्यों बैठे थे? क्यों उन्होंने अपनी भूपेश सरकार के कामकाज पर सवाल नहीं उठाए?वन मंत्री ने नवा रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक वृक्ष लगाने पर तंज कसने और हसदेव-तमनार में वृक्षों की कटाई पर विलाप करने पर कहा कि श्री बैज की भूलने की बीमारी अब एक बहुचर्चित फिल्म के नायक जैसी हो चली है। बैज कम-से-कम इतना तो याद रखें कि हसदेव-तमनार में जो पेड़ कट रहे हैं, उन खदानों की लीज कांग्रेस की भूपेश सरकार ने ही दी थी।
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