उदयपुर , नवम्बर 01 -- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि ग्राहकों से ही बैंक का अस्तित्व है, इसलिए बैंककर्मियों को चाहिए कि वे ग्राहक हित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करें और अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति तक वित्तीय समावेशन का लाभ पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हुए विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में योगदान दें।
श्री मल्होत्रा ने शनिवार को भुवाना स्थित सॉलिटेयर गार्डन एंड बैंक्वेट में आरबीआई की ओर से वित्तीय क्षेत्र में अदावाकृत संपत्ति के निपटान के लिए 'आपकी पूंजी आपका अधिकार' अभियान के तहत आयोजित विशेष शिविर को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आरबीआई की ओर से जो भी नियम-कायदे बनाये जाते हैं, वे ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखकर होते हैं। बैकों को चाहिए कि वे उन नियमों की सही व्याख्या करते हुए यथासंभव ग्राहकों को राहत उपलब्ध करायें।
श्री मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग अब सुविधा नहीं आवश्यकता का रूप ले चुकी है। आज से 30 वर्ष पहले तक हम साक्षरता की बात करते थे। ग्यारह वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सभी के लिए बैंक खाता खुलवाने की जनधन खाता मुहिम चली और अब हम डिजिटल साक्षरता पर बात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राजस्थान में 100 प्रतिशत लोग नेट बैंकिंग, मोबाइल एप अथवा युपीआई के माध्यम से डिजिटल साक्षरता से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही हमें डिजिटल धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से भी सावधान रहने की आवश्यकता है।
श्री मल्होत्रा ने 'आपकी पूंजी आपका अधिकार अभियान' के बारे में कहा कि देश भर में करोड़ों बैंक खाते ऐसे हैं, जिनमें करोडों रुपये की राशि पड़ी है, जिस पर किसी प्रकार का दावा नहीं हो रहा है। इनमें सरकारी खातों के अलावा आमजन के खाते अधिक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्व में कई लोग बैंक खाता खुलवाकर उसमें रकम जमा कराते थे, लेकिन बाद में उनकी मृत्यु होने और परिजनों को इसकी जानकारी नहीं होने से वह राशि खातों में ही रह जाती है। आरबीआई के माध्यम से इसी राशि को संबंधित हकदार तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में विभिन्न स्थलों पर शिविर आयोजित कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किये जा रहे हैं।
उन्होंने आमजनों से खातों के प्रति जागरूक रहकर अपनी अदावाकृत संपत्ति को प्राप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने बैंकिंग सेवाओं की पहुंच दूरदराज तक सुनिश्चित करने के लिए बैंक बीसी की संख्या बढ़ाने तथा स्वयंसहायता समूह की महिलाओं को बैंक सखी के रूप में जोड़ने का भी आह्वान किया।
भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य महाप्रबंधक मेरी सगस्या डी ने इस मौके पर बताया कि इस अभियान के तहत राज्यभर में 31 दिसंबर तक चरणबद्ध रूप से प्रत्येक जिले में जागरूकता एवं सहायता शिविर आयोजित किये जायेंगे, ताकि अधिक से अधिक नागरिक इस जनकल्याणकारी पहल का लाभ उठा सकें।
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