लखनऊ , नवंबर 17 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार के वकील से पूछा है कि प्रदेश के बेघर व बेसहारा लोगों के पुनर्वास के लिए क्या उपाय किए हैं। कोर्ट ने सरकारी वकील को इस मुद्दे पर भी अदालत को संतुष्ट करने का निर्देश दिया कि समिति द्वारा राजधानी में पाए गए 97 बेसहारा लोगों के पुनर्वास के लिए क्या किया है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश ज्योति राजपूत की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में मंदिरों, अस्पतालों, फुटपाथों आदि के पास रहने वाले बेघर, बेसहारा, मानसिक मंदित लोगों की पीड़ा के मुद्दे को उठाया गया है। याची ने ऐसे लोगों के समुचित इलाज समेत शरण देने के निर्देश जारी करने की गुजारिश की है। साथ ही इमरजेंसी में इलाज को लाए गए बेसहारा लोगों का मुद्दा भी उठाया है। कोर्ट ने इस मामले में शहर में बेसहारा लोगों का पता लगाने को एक समिति गठित की थी। समिति ने रिपोर्ट में राजधानी में ऐसे 97 बेसहारा लोगों की जानकारी दी है।

इसी 13 नवंबर को मामले की सुनवाई के समय महिला कल्याण विभाग की विशेष सचिव सुधा वर्मा, महिला कल्याण निदेशक संदीप कौर कोर्ट के समक्ष पेश हुईं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को नियत कर उस रोज इन दोनों अफसरों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेश होने की अनुमति दी है।

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