जालौन , मार्च 20 -- उत्तर प्रदेश के जालौन जिले सहित बुन्देलखण्ड की सांस्कृतिक परंपराओं में नारी को शक्ति और सम्मान का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यहां नारी को केवल परिवार की सदस्य नहीं, बल्कि सृजन और समाज की आधारशिला के रूप में देखा जाता है।

जिले में विशेष पर्वों जैसे "कुनघुसी पूनों" और "हरी ज्योति" में नारी और बालिकाओं का विधिवत पूजन किया जाता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले कुनघुसी पूनों पर्व में बहुओं का सम्मान और उन्हें उपहार दिए जाते हैं। वहीं श्रावण कृष्ण अमावस्या को मनाए जाने वाले हरी ज्योति पर्व में कन्याओं को देवी का स्थान दिया जाता है और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है।

स्थानीय परंपराओं में यह भी देखा जाता है कि विवाह के बाद बेटी के मायके वाले उसकी ससुराल का अन्न-जल ग्रहण नहीं करते और घर के पुरुष सदस्य प्रतिदिन घर की कन्या के चरण स्पर्श कर दिन की शुरुआत करते हैं। यह आदर भाव सामाजिक एकता और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बुन्देलखण्ड की ये प्राचीन परंपराएं नारी के सम्मान और समाज में संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। आधुनिक समय में भी यह संस्कृति यह संदेश देती है कि नारी को उचित सम्मान और स्थान देने से समाज स्वाभाविक रूप से उन्नति और समृद्धि की ओर अग्रसर होता है।

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