नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पेंशन और बीमा के मामले में सामाजिक सुरक्षा कवर देने में बीमा तथा पेंशन नियामक निकायों ने वित्तीय समावेशन को गहरा करने और वंचित वर्गों को सुरक्षा देने के लिए सुधारों को आगे बढ़ाया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को लोकसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कहा गया है कि पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने एक मज़बूत पेंशन व्यवस्था की नींव रखकर अपने उपभोक्ताओं को कई तरह के विकल्प देने की व्यवस्था की है जिसमें बड़ी आबादी को शामिल किया गया है।

इसी तरह से भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने भी नियमों को मज़बूत करते हुए अनुपालन के बोझ को कम कर बीमा कंपनियों को नवाचार के लिए ज़्यादा लचीलापन प्रदान किया है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि देश की पेंशन व्यवस्था बहु-स्तरीय है जिसमें मार्केट से जुड़ा नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), 2025 में शुरू की गई सरकार समर्थित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएल) और ज़्यादा कवरेज के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी दूसरी योजनाएं शामिल हैं। गत 31 दिसंबर तक एनपीएस के 211.7 लाख ग्राहक थे और मैनेज्ड एसेट्स की कीमत 16.1 करोड़ रुपये थी।

समीक्षा में बताया गया है कि पिछले दशक (वित्त वर्ष 15 से वित्त वर्ष 25) में, एनपीएस ग्राहक 9.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि (सीएजीआर) से बढ़े हैं, और एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) में 37.3 प्रतिशत की सीएजीआर से तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह, 2016 से चल रही एपीवाई ग्राहकों में 43.7 प्रतिशत की मज़बूत सीएजीआर से बढ़ोतरी हुई है, और एयूएम ने 64.5 प्रतिशत की सीएजीआर से शानदार वृद्धि दिखाई है।

पीएफआरडीए ने देश के बड़े अनौपचारिक कार्यबल को शामिल करने के लिए सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने पर ध्यान दिया है। अक्टूबर 2025 में शुरू किया गया एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल प्लेटफॉर्म (गिग) कामगारों को लक्षित करता है और उन्हें सेवा निवृत्ति बचत की मुख्यधारा से जोड़ता है। इसके अलावा, पीएफआरडीए, एनपीएस और एपीवाई के ज़रिए किसानों, एफपीओ सदस्यों और स्वयं सहायता समूह से जुड़े लोगों के साथ ही कृषि क्षेत्र के ज़्यादा कामगारों को पेंशन कवरेज देने के वास्ते किसान-उत्पादक संगठन (एफपीओ) और एमएसएमई के साथ साझेदारी कर रहा है।

पेंशन को लेकर जागरूकता का अभाव है जिससे कम आय वाले और ग्रामीण परिवारों की लंबी अवधि के सेवा निवृत्ति उत्पादों तक पहुंच सीमित है। आसान ऑनबोर्डिंग, एनपीएस लाइट वेरिएंट, एपीवाई आउटरीच अभियान, ई-एनपीएस, डिजिटल केवाईसी, लचीला योगदान संरचना, और नाबालिगों, गिग कामगारों तथा किसान समूहों के लिए लक्षित उत्पादों जैसे हाल के प्रयासों से पता चलता है कि कवरेज में इन लंबे समय से चली आ रही खाई को पाटने में प्रगति हो रही है।

सर्वेक्षण के अनुसार बीमा क्षेत्र '2047 तक सभी के लिए बीमा' की सोच से प्रेरित होकर एक महत्वपूर्ण बदलाव से गुज़र रहा है और आईआरडीएआई एक सिद्धांत-आधारित फ्रेमवर्क के तहत नियमों को मज़बूत कर उनका अनुपालन का बोझ कम करता है और बीमा कंपनियों को नवाचार के लिए ज़्यादा लचीलापन देता है जो बीमा व्यवस्था को डिजिटल करने और कवरेज को लोकतांत्रिक बनाने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि 'गैर-जीवन' बीमा खंड में संरचनात्मक बदलाव साफ दिख रहे हैं, जहां स्वास्थ्य बीमा, जो कुल घरेलू प्रीमियम का 41 प्रतिशत है और यह मोटर बीमा को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा बिजनेस बन गया है। समीक्षा में बताया गया है कि जीवन बीमा कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में कुल 6.3 लाख करोड़ रुपये के बेनिफिट्स का भुगतान किया। अभी 26 जीवन बीमा कंपनियां, 26 गैर-जीवन बीमा कंपनियां, सात स्वास्थ्य बीमा कंपनियां और दो विशेषज्ञता प्राप्त बीमा कंपनियां सक्रिय हैं और इन्हें 83 लाख से ज़्यादा वितरकों के नेटवर्क से मदद मिलती है।

मार्च 2025 तक बीमा कंपनियों के कुल कार्यालयों की संख्या 22,076 थी। समीक्षा में यह भी कहा गया है कि एजेंट, पॉइंट ऑफ़ सेल्स पर्सन और इंस्टीट्यूशनल पार्टनर से भरपूर वितरण नेटवर्क वित्त वर्ष 2021 में लगभग 48 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में लगभग 83 लाख हो गया।

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