भुवनेश्वर , जनवरी 09 -- डिशा में विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर राज्य में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के नेतृत्व वाली डबल इंजन की सरकार पोलावरम परियोजना से उत्पन्न मुद्दों का समाधान करने में विफल रहती है तो वह सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करेगी।
बीजद के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी उपाध्यक्ष देबी प्रसाद मिश्रा ने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस परियोजना से मलकानगिरी जिले के बड़े हिस्से के जलमग्न होने और सैकड़ों आदिवासी परिवारों के बेघर होने की आशंका है। पार्टी लगातार एक स्वतंत्र एवं तकनीकी रूप से सक्षम संगठन द्वारा बांध का नया अध्ययन कराने की मांग कर रही है, खासकर तब से जब परियोजना के मापदंडों को संशोधित किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधित पोलावरम परियोजना को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से वैध पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त नहीं है।
श्री मिश्रा ने कहा कि बीजद ने प्रभावित आदिवासी समुदायों के लिए प्रस्तावित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजनाओं की कमी पर बार-बार आपत्ति दर्ज की है। राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जन-केंद्रित प्रशासन होने का दावा करने के बावजूद सरकार मलकानगिरी के लोगों की दुर्दशा के प्रति असंवेदनशील है। उन्होंने बताया कि बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने अगस्त 2024 में मलकानगिरी जिले के प्रभावित मोटू क्षेत्र और सितंबर 2024 में पोलावरम बांध परियोजना स्थल का दौरा किया था। दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में, प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की आदिवासी आबादी पर परियोजना के प्रभाव के बारे में चिंताओं को उठाने के लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से भी मुलाकात की थी।
उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों के साथ भी चर्चा की है। उन्होंने चिंता जतायी कि गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अनुसार, परियोजना की बाढ़ निर्वहन क्षमता 36 लाख क्यूसेक, बांध की ऊंचाई 140 फीट और अधिकतम बाढ़ स्तर 150 फीट निर्धारित की गई थीउन्होंने आरोप लगाया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ओडिशा के प्रभावित क्षेत्रों में अनिवार्य जन सुनवाई आयोजित किए बिना, 2014, 2015 और 2016 में जारी पत्रों के माध्यम से बार-बार "कार्य रोकने के आदेश" को स्थगित रखा। इसके कारण तत्कालीन ओडिशा सरकार ने परियोजना को दी गई मंजूरी को चुनौती देते हुए शीर्ष न्यायालय में मूल वाद संख्या 4/2007 दायर किया। पोलावरम परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किए जाने के बाद संशोधन याचिका दायर की गई।
श्री मिश्रा ने आगे कहा कि जहां आंध्र प्रदेश ने बांध अध्ययन करके कोंटा में जलमग्नता स्तर को संशोधित करते हुए 220 फीट बताया, वहीं ओडिशा सरकार के अनुरोध पर आईआईटी रुड़की द्वारा किए गए एक अध्ययन में बाढ़ के पानी प्रवाह की क्षमता 58 लाख क्यूसेक बताई गई, जिससे जलमग्नता स्तर 232 फीट तक पहुंच गया। उन्होंने दावा किया कि इससे हजारों आदिवासी समूहों के सदस्य प्रभावित होंगे और चेतावनी दी कि परियोजना पूरी होने के बाद मलकानगिरी जिले के सैकड़ों गांव जलमग्न हो जाएंगे। उन्होंने स्वयं आदिवासी मूल के मुख्यमंत्री से ओडिशा के आदिवासी समुदायों के हित में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
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