, Feb. 9 -- अपर मुख्य सचिव ने मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली पर जानकारी देते हुए बताया कि इसके अंतर्गत मानव संसाधन प्रशासन का पूर्ण डिजिटलीकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक 2.72 लाख सेवा अभिलेखों का डिजिटलीकरण, 1.23 करोड़ से अधिक पृष्ठों की स्कैनिंग तथा 48 विभागों के लगभग आठ लाख कर्मियों के सेवा एवं वेतन प्रबंधन का कार्य संपन्न किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सभी समूह 'क', 'ख' एवं 'ग' के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति एवं दायित्वों का विवरण संबंधित वेबसाइट पर नियमित रूप से अपलोड किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है।
डॉ. राजेन्दर ने हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2010 में प्रारंभ की गई "जिज्ञासा" केंद्रीय हेल्पलाइन (टोल फ्री नंबर 14403) के माध्यम से अब तक 7.92 लाख से अधिक नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराई गई है। वहीं, बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2016 में प्रारंभ किए गए समाधान कॉल सेंटर (टोल फ्री नंबर 1800-345-6284) के माध्यम से 12.35 लाख से अधिक नागरिकों ने शिकायत दर्ज कराई अथवा आवश्यक जानकारी प्राप्त की है।
अपर मुख्य सचिव ने अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों की भी जानकारी दी। इनमें गया शहर का नाम "गया जी" किया जाना, बिहार सरकारी सेवक परिवीक्षा अवधि नियमावली, 2024 का मास्टर सर्कुलर, सचिवालय के विभागों एवं अधिकारियों के कार्यों को सुव्यवस्थित करने के लिये मानक संचालन प्रक्रिया का निर्धारण, सरकारी कार्यालयों में प्राप्त पत्रों की पावती से संबंधित परिपत्र तथा सामान्य प्रशासन विभाग की सभी शाखाओं का मास्टर सर्कुलर एवं रेडी रेकनर तैयार कर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड किया जाना शामिल है।
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