पटना , अक्टूबर 31 -- बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार समाज के हाशिये पर माने जाने वाले किन्नर समुदाय की दो प्रतिनिधियां प्रीति किन्नर और माया रानी ने राजनीतिक अखाड़े में उतरकर लोकतंत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।

राज्य में दो चरणों में होने वाले चुनाव में कुल 2616 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से ये दो उम्मीदवार किन्नर समुदाय से हैं। यह न केवल एक सामाजिक बदलाव का संकेत है, बल्कि राजनीति में समान प्रतिनिधित्व की दिशा में एक अहम कदम भी माना जा रहा है।

गोपालगंज के भोरे विधानसभा क्षेत्र से जन सुराज पार्टी की उम्मीदवार प्रीति किन्नर विकास, शिक्षा और सामाजिक समानता के मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में हैं। वहीं, माया रानी ने नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी अपनी दावेदारी पेश की है। दोनों उम्मीदवारों का कहना है कि वे समाज के उस तबके की आवाज़ बनना चाहती हैं, जो अब तक मुख्यधारा की राजनीति से दूर रहा है।

इससे पहले वर्ष 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में किन्नर समुदाय से केवल एक उम्मीदवार राम दर्शन प्रसाद उर्फ मुन्ना किन्नर ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर हथुआ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।

दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश के बाद बिहार देश का दूसरा राज्य है, जहां किन्नर कल्याण समिति का गठन किया गया है। इस समिति का उद्देश्य किन्नर समुदाय को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय की मुख्यधारा से जोड़ना है। हालांकि, अगस्त महीने में समिति के पुनर्गठन के केवल तीन माह बाद हो रहे इस चुनाव में न तो सत्तापक्ष और न ही विपक्षी दलों ने किसी किन्नर को अपना प्रत्याशी बनाया है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल 1,725 किन्नर मतदाता पंजीकृत हैं। जानकारों का मानना है कि भले ही यह संख्या सीमित हो, लेकिन यह समुदाय अब राजनीतिक जागरूकता और अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

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