, March 9 -- श्री सिन्हा ने बताया कि भूमि विवादों में पुलिस के अनावश्यक हस्तक्षेप को रोकने के लिए सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि भूमि विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। उन्होने कहा कि पुलिस का दायित्व केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया किअनुसूचित जाति-जनजाति पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए "ऑपरेशन भूमि दखल देहानी" अभियान शुरू किया गया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचलाधिकारियों को सौंपी गई है। परिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पारिवारिक बंटवारा पोर्टल की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से बंटवारा और दाखिल-खारिज के लिए एक साथ ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इससे सभी हिस्सेदारों के नाम स्वतः अलग-अलग दाखिल-खारिज हो सकेंगे।
श्री सिन्हा ने बताया कि एक जनवरी से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित नकल केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है और "चिरकुट फाइल" से नकल निकालने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि फर्जी दस्तावेज लगाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। अब तक इस मामले में दर्जन भर से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। राजस्व न्यायालयों में सुधार करते हुए न्यायालय प्रबंधन प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है और समान मामलों में समान निर्णय सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि जनसुनवाई व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए 19 जनवरी से सभी राजस्व कार्यालयों में सोमवार और शुक्रवार को जनसुनवाई तथा प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालयों में जनता दरबार आयोजित करने की व्यवस्था की गई है। औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों में लैंड बैंक बनाने का निर्देश दिया गया है। साथ ही सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए दाखिल-खारिज मामलों के त्वरित निष्पादन पर जोर दिया गया है।
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