, Feb. 6 -- श्री यादव ने कहा कि बिहार कृषि निर्यात नीति के जरिए किसानों की उपज को सीधे वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है। मखाना, शहद, फल-सब्ज़ियाँ, मसाले और जीआई टैग प्राप्त उत्पाद बिहार की गुणवत्ता और पहचान को मजबूत कर रहे हैं। राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और प्रस्तावित शहद नीति आय वृद्धि का सशक्त आधार हैं। उन्होंने कहा कि हर जिले में विशेष फसल आधारित क्लस्टर बनाकर खेती को रोजगार, उद्योग और निर्यात से जोड़ा जाएगा। बागवानी और विशिष्ट फसलें आज किसानों के लिए एटीएम के समान हैं, जो त्वरित आय और स्थायी समृद्धि का मार्ग खोलती हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि अब खेती को कम लागत और अधिक मुनाफे की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। धान और गेहूँ के साथ-साथ ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, केला, आंवला, सब्जी एवं मसाला फसलें जैसे मिर्च, हल्दी, धनिया, लहसुन और प्याज किसानों की आय बढ़ाने का नया इंजन बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के हर जिले में स्थानीय जलवायु के अनुरूप हाई-वैल्यू क्लस्टर विकसित किए जाएँ, जहाँ नर्सरी से लेकर उत्पादन, पैकिंग, प्रोसेसिंग और बिक्री की समुचित व्यवस्था एक ही स्थान पर हो।

श्री यादव ने कहा कि सरकार का फोकस तीन स्तंभों तकनीक, निवेश और रोजगार पर आधारित है। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, पॉली एवं नेट हाउस, टिशू कल्चर पौधे, मृदा परीक्षण, समेकित कीट-रोग प्रबंधन और सटीक पोषण प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उद्यान निदेशालय के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, तकनीकी मार्गदर्शन तथा गुणवत्तापूर्ण पौध एवं बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि बागवानी केवल खेती नहीं, बल्कि रोजगार का बड़ा स्रोत है। नर्सरी, ग्रेडिंग-सॉर्टिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, परिवहन, प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स के माध्यम से लाखों रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। इसके लिए हर प्रखंड में किसान उत्पादक संगठनों को सशक्त किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके और बिचौलियों की भूमिका घटे।

श्री यादव ने बताया कि मधुमक्खी पालन और मखाना बिहार की विशिष्ट पहचान हैं। इन क्षेत्रों में समग्र विकास, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता जाँच और "बिहार ब्रांड" के माध्यम से बाजार तक पहुँच को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि योजनाओं का लाभ समय पर, पारदर्शी तरीके से सीधे खेतों तक पहुँचे। उन्होंने किसानों, युवाओं और महिला समूहों से आधुनिक खेती अपनाने, कृषि आधारित उद्यम शुरू करने और बिहार को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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