, Feb. 12 -- श्री यादव ने कहा कि स्थानीय जलवायु, मृदा की गुणवत्ता तथा बाजार की मांग के अनुरूप फसल नियोजन से उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि संभव है, जिससे निर्यात की संभावनाएँ सुदृढ़ होंगी।उन्होंने कहा कि कृषि रोड मैप के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में उत्पादन, उत्पादकता, विविधीकरण एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के साथ फल, सब्जी, बागवानी, मखाना, शहद एवं अन्य उच्च मूल्य फसलों में बिहार ने विशिष्ट पहचान बनाई है।

इस अवसर पर बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि राज्य की कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए एरिया-स्पेसिफिक एवं जोन-स्पेसिफिक खेती की स्पष्ट रणनीति अपनानी होगी। प्रत्येक जिले की मृदा संरचना, जल उपलब्धता और जलवायु के अनुरूप फसलों का वैज्ञानिक चयन कर योजनाबद्ध ढंग से उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से हरा चना के उत्पादन विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि इसकी आपूर्ति राज्य की सीमाओं से बाहर अन्य राज्यों तक सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे किसानों को व्यापक बाजार, बेहतर मूल्य और स्थिर आय मिल सके।

श्री सिंह ने कहा कि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि के लिए उद्यानिकी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना समय की माँग है। अब ध्यान केवल उत्पादकता पर नहीं, बल्कि लाभप्रदता पर केंद्रित होना चाहिए। जिला-वार विशिष्ट फसलों की पहचान, उच्च उपज वाले बीजों का व्यापक उपयोग, आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण और प्रभावी विपणन तंत्र के माध्यम से कृषि को अधिक मूल्यवान और लाभकारी बनाया जा सकता है।

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