राजगीर , फरवरी 10 -- बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) के अंतर्गत मंगलवार को बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड की ऋण नीति पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

राजगीर में आयोजित कार्यशाला में जीविका के प्रखंड तथा जिला स्तरीय कर्मियों को ऋण प्रशासन, पात्रता मानदंड और डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सामुदायिक संगठनों से जुड़े परिवारों का रोजगारपरक गतिविधियों को बढ़ाने के लिये तकनीकी रूप से त्वरित वितिय सेवाएं प्रदान करना एवं उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रयासरत रहना है। कार्यशला में जीविका निधि के संचालन और लाभों पर विस्तृत जानकारी दी गई।

स्वयं सहायता समूह के सदस्य अब अधिक राशि तक ऋण प्राप्त कर सकेंगी, जिससे उनके व्यवसाय और आजीविका गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करना है।

उल्लेखनीय है कि संकुल स्तरीय प्राथमिक सहकारी समितियों के माध्यम स्वयं सहायता समूहो के सदस्यो को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिये राज्य स्त्तर पर बिहार सहकारी सोसायटी अधिनियम 1935 के अधीन राज्य स्त्तर पर बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संध लिमिटेड पटना के नाम से इसका निबंधन 29-05-2025 को किया गया है। इसके साथ ही 02-09-2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गरिमायी उपस्थिति में जीविका निधि का ऑनलाइन माध्यम से उद्घाटन किया गया था।

जीविका निधि की आवश्यकता बैंकों एवं माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) पर महिलाओं की निर्भरता को कैसे कम किया जा सकता है, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ बैंकों और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों पर उनकी निर्भरता भी बढ़ी है, क्योंकि वे शिक्षा, शादी, छोटे-छोटे व्यवसाय, घरेलू उद्योग और स्व-रोज़गार कार्यों के लिए ऋण लेती हैं। बिना सोचे समझे अत्यधिक ऋण पर निर्भरता कभी-कभी ब्याज के बोझ, ऋण चक्र और आर्थिक अस्थिरता का कारण बन सकती है। इसलिए महिलाओं की इन संस्थानों पर निर्भरता कम करने के कई प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं।

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